केलंग। हिमाचल प्रदेश के लाहुल घाटी में स्थित पवित्र पर्वत ड्रिलबुरी की परिक्रमा के दौरान बड़ा हादसा सामने आया है। बर्फबारी और खराब मौसम की चपेट में आने से दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य श्रद्धालु घायल हुए हैं।
बताया जा रहा है कि धार्मिक यात्रा के दौरान कई श्रद्धालु बर्फ पर फिसलने, ऊंचाई से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं और हाइपोथर्मिया की चपेट में आ गए। घायलों में बुजुर्गों और बच्चों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
बर्फबारी के बीच जारी थी धार्मिक यात्रा
जानकारी के अनुसार, लाहुल घाटी के पवित्र पर्वत ड्रिलबुरी की परिक्रमा के लिए बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान मौसम अचानक खराब हो गया और क्षेत्र में बर्फबारी शुरू हो गई।
ऊंचाई वाले इलाके में अचानक बदले मौसम के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग बर्फ में फिसलकर घायल हो गए, वहीं कुछ श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन की कमी और ठंड के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हुईं।
दो महिला श्रद्धालुओं की मौत
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, बर्फबारी और ठंड की स्थिति के बीच दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई।
मृतकों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। प्रशासन और संबंधित विभाग घटना की जानकारी एकत्र कर रहे हैं।
कई श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती
घटना के बाद घायल श्रद्धालुओं को उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल केलंग लाया गया। अस्पताल में ऊंचाई से संबंधित परेशानियों और चोटों के कारण भर्ती होने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है।
चिकित्सकों की टीम घायलों का इलाज कर रही है। अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीजों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
हाई एल्टीट्यूड सिकनेस बनी चुनौती
लाहुल घाटी जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम ऑक्सीजन के कारण श्रद्धालुओं को हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा रहता है।
इस यात्रा में शामिल कई श्रद्धालु ऊंचाई के कारण सांस लेने में परेशानी, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हुए।
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में जाने से पहले शरीर को वहां के वातावरण के अनुसार तैयार करना जरूरी होता है।
हाइपोथर्मिया का भी खतरा
बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के बीच लंबे समय तक रहने से श्रद्धालुओं में हाइपोथर्मिया की समस्या भी सामने आई।
हाइपोथर्मिया में शरीर का तापमान सामान्य से काफी कम हो जाता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है।
प्रशासन ने ऐसे मौसम में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
प्रशासन और राहत दल सक्रिय
घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। राहत और बचाव से जुड़े दलों ने प्रभावित श्रद्धालुओं की मदद की।
प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
यात्रा के दौरान सावधानी की अपील
लाहुल जैसे दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है। ऐसे में प्रशासन समय-समय पर यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचाई वाले धार्मिक स्थलों की यात्रा के दौरान मौसम की जानकारी, स्वास्थ्य स्थिति और सुरक्षा उपायों का ध्यान रखना जरूरी है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद ऊंचाई वाले धार्मिक स्थलों पर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
ऐसे क्षेत्रों में मौसम की निगरानी, मेडिकल सुविधा और आपातकालीन सहायता व्यवस्था को मजबूत रखना जरूरी माना जाता है।
जांच और आगे की व्यवस्था पर नजर
फिलहाल प्रशासन घटना के कारणों और प्रभावित श्रद्धालुओं की स्थिति की जानकारी जुटा रहा है। घायलों का उपचार जारी है और आगे की स्थिति के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।
ड्रिलबुरी पर्वत परिक्रमा के दौरान हुआ यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम की चुनौती और यात्रियों की सुरक्षा के महत्व को सामने लाता है।