हिमाचल प्रदेश में मानसून आपदा से जुड़े एक मामले में, अधिकारियों द्वारा आदेशों का पालन न करने को लेकर गंभीर संज्ञान लिया गया है। अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की मुख्य पीठ ने 'नगर एवं ग्राम नियोजन' (Town and Country Planning) विभाग के प्रधान सचिव के पेश न होने पर कड़ा रुख अपनाया है। राज्य में मानसून आपदा और कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों से जुड़ी कार्यवाही में उन्हें वर्चुअली (ऑनलाइन) उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए।
यह मामला 25 नवंबर 2023 को एक अखबार में छपी रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसका शीर्षक था- "हिमाचल प्रदेश में मानसून आपदा के पीछे वनों की कटाई, खराब योजना के तहत निर्माण और अवैज्ञानिक व अवैध खनन"।
 4 अगस्त 2026 के आदेश का स्पष्ट रूप से पालन नहीं किया गया है। पीठ ने गौर किया कि राज्य सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारी—जिनमें मुख्य सचिव, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रधान सचिव, और वन एवं पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं—की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। उनकी अनुपस्थिति के कारण उस दिन कार्यवाही को प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से बुलाने के बजाय, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रधान सचिव को 13 अक्टूबर 2026 को वर्चुअली उपस्थित होने का निर्देश दिया था। हालांकि, वे तय तारीख पर पेश नहीं हुए। उनकी ओर से कार्यवाही में शामिल होने में आ रही किसी कठिनाई के बारे में कोई आवेदन भी दाखिल नहीं किया गया था।
अपने पिछले आदेश का पालन न होने को देखते हुए, पीठ ने आगे के निर्देश जारी करना जरूरी समझा। मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रधान सचिव अगली सुनवाई में वर्चुअली उपस्थित हों। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि प्रधान सचिव उपस्थित नहीं होते हैं, तो ट्रिब्यूनल की सहायता के लिए मुख्य सचिव को स्वयं वर्चुअली पेश होना होगा। आदेश की एक प्रति अनुपालन के लिए मुख्य सचिव को भेज दी गई है। अगली सुनवाई 22 जनवरी 2027 को तय की गई है।
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