हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी (HPU) ने रिसर्च, इनोवेशन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी इकोसिस्टम को मज़बूत करने के मकसद से मौजूदा एकेडमिक सेशन में कम से कम 50 पेटेंट हासिल करने का लक्ष्य रखा है। यूनिवर्सिटी ने फैकल्टी सदस्यों और रिसर्च स्कॉलर्स को अपनी इनोवेटिव रिसर्च को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी में बदलने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से योग्य आवेदनों के लिए पेटेंट फाइलिंग और प्रोसेसिंग का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया है। यह खर्च प्रति पेटेंट लगभग 35,000 से 40,000 रुपये होगा। यूनिवर्सिटी के IPR सेल द्वारा आयोजित "आइडिया से पेटेंट तक" (From Idea to Patent) विषय पर एक वर्कशॉप में हिस्सा लेने वालों को संबोधित करते हुए वाइस-चांसलर प्रो. महावीर सिंह ने यह बात कही।
इस मौके पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (बौद्धिक संपदा अधिकार) समय की ज़रूरत बन गए हैं, खासकर हायर एजुकेशन संस्थानों के लिए। प्रो. सिंह ने कहा, "यूनिवर्सिटीज़ की पहचान अब दुनिया भर में न केवल उनके एकेडमिक प्रोग्राम्स से, बल्कि उनकी रिसर्च, इनोवेशन, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, पेटेंट और ज्ञान व टेक्नोलॉजी के विकास में उनके योगदान से भी तेज़ी से हो रही है।"
उन्होंने डिपार्टमेंट के प्रमुखों, फैकल्टी सदस्यों और रिसर्च स्कॉलर्स से मिलकर और अलग-अलग विषयों के तालमेल (interdisciplinary manner) के साथ काम करने और अपनी रिसर्च में पेटेंट की संभावनाओं को सक्रिय रूप से तलाशने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "HPU में फैकल्टी की विशेषज्ञता, रिसर्च गतिविधियों और इनोवेटिव आइडियाज़ के मामले में बहुत क्षमता है, और इस क्षमता को पेटेंट, टेक्नोलॉजी और सामाजिक उपयोग जैसे ठोस नतीजों में बदला जाना चाहिए।"
वाइस-चांसलर ने कहा, "पेटेंट से जुड़ा पूरा खर्च उठाने का फैसला रिसर्चर्स पर आर्थिक बोझ कम करने के मकसद से लिया गया है। पेटेंट फाइलिंग और प्रोसेसिंग में प्रति आवेदन लगभग 35,000 से 40,000 रुपये का खर्च आ सकता है, और PM-USHA फंड के तहत यह आर्थिक मदद देने के यूनिवर्सिटी के फैसले से और ज़्यादा फैकल्टी सदस्यों और रिसर्च स्कॉलर्स के अपने इनोवेशन के साथ आगे आने की उम्मीद है।" उन्होंने रिसर्चर्स को रिसर्च के पारंपरिक पब्लिकेशन से आगे बढ़कर यह देखने के लिए भी प्रोत्साहित किया कि क्या उनके रिसर्च के नतीजों को पेटेंट के ज़रिए सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने यूनिवर्सिटी समुदाय से इनोवेशन, आविष्कार, रिसर्च को असल इस्तेमाल में लाने और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की सुरक्षा का एक मज़बूत कल्चर विकसित करने का आह्वान किया।
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