झज्जर। जिले में इन दिनों मौसम के मिजाज में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी आसमान में बादल छा रहे हैं तो कभी दिन में तेज धूप निकल रही है। मौसम के इस उतार-चढ़ाव के बीच बाजरे की फसल तेजी से पककर तैयार होने लगी है। जिले के रेतीले क्षेत्रों में किसानों ने बाजरे की कटाई और कड़ाई का काम भी शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में कटाई का काम और तेज होने की संभावना है।

कृषि विभाग के अनुसार, इस बार जिले में 60 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में बाजरे की बिजाई की गई है। दिन में निकल रही तेज धूप से बाजरे की बालियां तेजी से पक रही हैं। किसानों ने फसल काटने के साथ उसे सुखाने और इसके बाद अनाज मंडियों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है।

सितंबर के अंतिम सप्ताह में बढ़ेगी आवक

बाजरे की फसल पकने के साथ ही अब किसानों की नजर अनाज मंडियों पर भी है। माना जा रहा है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह तक मंडियों में बाजरे की आवक बढ़ने लगेगी। फिलहाल शुरुआती तौर पर उन क्षेत्रों में कटाई शुरू हुई है, जहां फसल पहले पककर तैयार हो गई है।

जैसे-जैसे मौसम साफ रहेगा और तेज धूप निकलेगी, दूसरे क्षेत्रों में भी कटाई का काम शुरू हो जाएगा। किसान फसल की नमी कम होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि कटाई के बाद बाजरे को अच्छी तरह सुखाया जा सके।

मंडी तक फसल पहुंचाने से पहले किसानों के लिए बाजरे को पर्याप्त रूप से सुखाना जरूरी होता है। अधिक नमी होने पर फसल के भंडारण और गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसान मौसम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

60 हजार एकड़ से अधिक में बाजरे की बिजाई

कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, जिले में इस सीजन में 60 हजार एकड़ से अधिक भूमि पर बाजरे की बिजाई हुई है। रेतीले और अपेक्षाकृत कम पानी वाले क्षेत्रों में बाजरे की खेती प्रमुखता से की जाती है।

बाजरा कम पानी में तैयार होने वाली फसलों में शामिल है। यही कारण है कि जिले के रेतीले इलाकों में किसान इसकी खेती को प्राथमिकता देते हैं। अब फसल पकने के बाद खेतों में कटाई की गतिविधियां दिखाई देने लगी हैं।

किसानों ने कटाई के लिए मजदूरों और कृषि उपकरणों की व्यवस्था भी शुरू कर दी है। जिन खेतों में फसल पूरी तरह पक चुकी है, वहां कटाई की जा रही है, जबकि अन्य किसान कुछ दिन और इंतजार कर रहे हैं।

तेज धूप से जल्दी पक रही बालियां

पिछले कुछ दिनों से दिन के समय निकल रही तेज धूप का असर बाजरे की फसल पर साफ दिखाई दे रहा है। फसल की बालियां तेजी से पक रही हैं। हालांकि बीच-बीच में बादल छाने से किसान मौसम में अचानक बदलाव को लेकर सतर्क भी हैं।

कटाई के समय बारिश होने पर तैयार फसल प्रभावित हो सकती है। खेत में खड़ी फसल के साथ काटकर रखी गई उपज को भी नुकसान होने का खतरा रहता है। इसी वजह से किसान मौसम को देखते हुए कटाई की योजना बना रहे हैं।

यदि आने वाले दिनों में मौसम साफ रहता है तो बाजरे की कटाई का काम तेजी से आगे बढ़ सकता है। इसके बाद खेतों से बाजरा निकालने, सुखाने और मंडियों तक पहुंचाने का सिलसिला शुरू होगा।

किसानों ने शुरू की मंडी की तैयारी

कटाई के साथ ही किसानों ने अपनी उपज को मंडियों में पहुंचाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। फसल की कटाई के बाद बाजरे को सुखाया जाएगा। पर्याप्त रूप से सूखने के बाद किसान इसे बिक्री के लिए मंडी लेकर जाएंगे।

सितंबर के अंतिम सप्ताह से बाजरे की आवक बढ़ने की संभावना को देखते हुए मंडियों में भी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। बड़ी मात्रा में फसल आने पर खरीद, तुलाई और उठान से जुड़ी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होंगी।

किसानों की नजर इस बार बाजार में मिलने वाले भाव पर भी रहेगी। उत्पादन लागत के मुकाबले बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद में किसान फसल की गुणवत्ता बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।

बदलते मौसम से स्वास्थ्य पर भी असर

मौसम में हो रहा लगातार बदलाव केवल खेती तक सीमित नहीं है। इसका असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है। दिन में तेज धूप और सुबह-शाम मौसम में बदलाव के कारण लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

तापमान में उतार-चढ़ाव के दौरान सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसी मौसमी परेशानियां बढ़ सकती हैं। खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को भी तेज धूप में लंबे समय तक काम करने के दौरान पर्याप्त पानी पीने और शरीर को निर्जलीकरण से बचाने की जरूरत है।

विशेष रूप से बाजरे की कटाई के समय किसानों और मजदूरों को कई घंटे खेतों में रहना पड़ता है। ऐसे में मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए काम के दौरान सावधानी जरूरी है।

बारिश हुई तो बढ़ सकती है परेशानी

बाजरे की फसल अब कटाई के चरण में पहुंचने लगी है। ऐसे समय में बारिश किसानों की चिंता बढ़ा सकती है। तैयार फसल पर बारिश होने से दानों में नमी बढ़ सकती है और कटाई का काम प्रभावित हो सकता है।

कटाई के बाद खेत में रखी फसल भी बारिश की चपेट में आने पर खराब हो सकती है। इसलिए किसान फसल को काटने के बाद जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और सुखाने की तैयारी कर रहे हैं।

मौसम साफ रहने की स्थिति में अगले कुछ दिनों में जिले के अन्य क्षेत्रों में भी कटाई शुरू होने की संभावना है।

अब मंडियों में बाजरे की आवक का इंतजार

जिले के रेतीले क्षेत्रों में शुरू हुई बाजरे की कटाई आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर पहुंच सकती है। 60 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में बोई गई फसल के तैयार होने के साथ खेतों में कृषि गतिविधियां तेज हो गई हैं।

किसानों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण मौसम का साथ मिलना है। यदि कटाई के दौरान बारिश नहीं होती और धूप बनी रहती है तो फसल को सुखाने और मंडी तक पहुंचाने में आसानी होगी।

सितंबर के अंतिम सप्ताह तक मंडियों में बाजरे की आवक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन बाजरा उत्पादक किसानों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। फिलहाल किसान तेजी से पक रही फसल की कटाई, कड़ाई और उसे बाजार तक पहुंचाने की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

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