गुरुग्राम। त्योहारी सीजन के बीच मिलावटी और सिंथेटिक पनीर को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी बढ़ गई है। इसी कड़ी में गुरुग्राम में फूड एंड ड्रग्स अथॉरिटी (FDA) की टीम ने तीन डेयरी और फूड आउटलेट्स पर छापेमारी की। अधिकारियों के मुताबिक इन ठिकानों पर सिंथेटिक और घटिया गुणवत्ता वाले पनीर की शिकायतें मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। टीम ने अलग-अलग प्रतिष्ठानों से पनीर के कई सैंपल लिए हैं, जिन्हें रासायनिक जांच के लिए चंडीगढ़ स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया है।फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लिए गए सैंपलों की लैब रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले यह कहना सही नहीं होगा कि छापेमारी वाले सभी ठिकानों पर नकली पनीर ही पाया गया था। अधिकारियों ने शिकायतों और गुणवत्ता को लेकर संदेह के आधार पर सैंपल लिए हैं और अब इनकी वैज्ञानिक जांच का इंतजार किया जा रहा है।
तीन ठिकानों पर पहुंची टीम
जानकारी के मुताबिक खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार और मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम ने संयुक्त रूप से तीन प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इनमें दो प्रतिष्ठान सोहना क्षेत्र में और एक पालम विहार में बताया गया है। टीम ने मौके पर उपलब्ध पनीर की जांच की और अलग-अलग नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को आगे की रासायनिक जांच के लिए चंडीगढ़ स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया।खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की इस कार्रवाई का मकसद बाजार में बिक रहे पनीर की गुणवत्ता की जांच करना है। खासकर ऐसे समय में जब सिंथेटिक या एनालॉग पनीर को लेकर देशभर में चिंता बढ़ी हुई है, खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शिकायतों के बाद बढ़ी निगरानी
अधिकारियों के मुताबिक तीनों प्रतिष्ठानों के खिलाफ सिंथेटिक और घटिया पनीर को लेकर शिकायतें मिली थीं। शिकायतों के आधार पर टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर शिकायत मिलने पर विभाग सैंपल लेकर प्रयोगशाला में उनकी जांच कराता है। यदि जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।हालांकि, वर्तमान मामले में अभी लैब रिपोर्ट का इंतजार है। इसलिए किसी प्रतिष्ठान को दोषी घोषित करना जल्दबाजी होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लिए गए पनीर के नमूने निर्धारित गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।
क्या होता है एनालॉग या सिंथेटिक पनीर?
पनीर को लेकर हाल के दिनों में **एनालॉग पनीर** शब्द लगातार चर्चा में है। पारंपरिक पनीर मुख्य रूप से दूध से तैयार किया जाता है, जबकि एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर में दूध के वसा या अन्य ठोस पदार्थों के स्थान पर कुछ गैर-डेयरी घटकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों को लेकर मुख्य चिंता उनकी पहचान, लेबलिंग और उपभोक्ताओं को सही जानकारी दिए जाने से जुड़ी है।यही वजह है कि खाद्य नियामक स्तर पर भी एनालॉग पनीर को लेकर चर्चा चल रही है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) देशभर में एनालॉग पनीर से जुड़े नियमों पर विचार कर रहा है। कई राज्यों ने पहले ही इस तरह के उत्पादों को लेकर अलग-अलग स्तर पर कदम उठाए हैं।
हर सफेद पनीर नकली नहीं होता
पनीर का रंग, बनावट या कीमत देखकर उसे नकली घोषित करना सही तरीका नहीं है। किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट या मानकों के उल्लंघन का पता वैज्ञानिक परीक्षण से ही लगाया जा सकता है। यही वजह है कि गुरुग्राम में भी FDA की टीम ने मौके से पनीर के नमूने लिए और उन्हें प्रयोगशाला भेजा है।उपभोक्ताओं के लिए भी यह समझना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर चलने वाले किसी वीडियो या दावे के आधार पर हर पनीर को नकली मान लेना उचित नहीं है। किसी खास ब्रांड, दुकान या उत्पाद के बारे में निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।
पहले भी सामने आ चुका है सिंथेटिक पनीर का मामला
हरियाणा के नूंह जिले में भी हाल के दिनों में कथित मिलावटी और सिंथेटिक पनीर बनाने वाली इकाइयों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। एक कार्रवाई में करीब 7,500 से 7,600 किलोग्राम संदिग्ध सिंथेटिक पनीर जब्त किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। अधिकारियों ने बताया था कि वहां कुछ इकाइयों में पनीर तैयार करने और इस्तेमाल होने वाली सामग्री की भी जांच की गई।रिपोर्टों के मुताबिक नूंह क्षेत्र में तैयार होने वाला कुछ पनीर दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और मथुरा जैसे आसपास के शहरों में पहुंचने की बात भी सामने आई थी। यही कारण है कि गुरुग्राम जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार में खाद्य सुरक्षा जांच को लेकर विशेष सतर्कता देखी जा रही है।
पनीर खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
उपभोक्ताओं को पनीर खरीदते समय कुछ सामान्य सावधानियां बरतनी चाहिए। सबसे पहले विश्वसनीय विक्रेता से ही खरीदारी करना बेहतर है। पैकेज्ड उत्पाद खरीदते समय लेबल, निर्माता का नाम, सामग्री और अन्य जरूरी जानकारी देखनी चाहिए। खुले पनीर की स्थिति में भी उसकी स्वच्छता और रखरखाव पर ध्यान देना जरूरी है।लेकिन केवल देखकर यह तय करना संभव नहीं है कि कोई पनीर मिलावटी है या नहीं। इसलिए संदिग्ध खाद्य पदार्थ मिलने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को शिकायत करना ज्यादा उचित तरीका है।
अब लैब रिपोर्ट पर टिकी नजर
गुरुग्राम में हुई ताजा छापेमारी के बाद सबसे अहम दस्तावेज अब प्रयोगशाला की रिपोर्ट होगी। तीन प्रतिष्ठानों से लिए गए पनीर के नमूनों की रासायनिक जांच के बाद ही पता चलेगा कि उनमें किसी तरह की मिलावट, निर्धारित मानकों का उल्लंघन या अन्य गुणवत्ता संबंधी समस्या मौजूद है या नहीं।इस मामले में फिलहाल इतना स्पष्ट है कि शिकायतों के आधार पर FDA ने तीन स्थानों पर निरीक्षण किया और पनीर के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। **लैब रिपोर्ट आने तक इसे 'नकली पनीर' कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।** यदि जांच में गड़बड़ी सामने आती है तो खाद्य सुरक्षा कानून के तहत संबंधित प्रतिष्ठानों पर आगे की कार्रवाई हो सकती है।त्योहारी मौसम में दूध और दूध से बने उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर सतर्कता भी बढ़ जाती है। गुरुग्राम की यह कार्रवाई इसी निगरानी का हिस्सा है। अब उपभोक्ताओं और विभाग दोनों की नजर चंडीगढ़ की प्रयोगशाला से आने वाली रिपोर्ट पर है।
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