महिला समूह अब फैशन जोन से बाजार में प्रतिस्पर्धी के रूप में बना रही पहचान

छग

Update: 2026-01-16 12:47 GMT
Mahasamund. महासमुंद। महिला समूह परम्परागत व्यवसाय से उठकर अब बाजार आधारित मांग के अनुरूप अपना व्यवसाय का चयन कर रही है और बाजर में एक सशक्त प्रतिस्पर्धी के रूप में खुद की पहचान बना रही है। शुरूआती दिनों में महिला सदस्य घर से जुड़े व्यवसाय जैसे बड़ी, पापड़, आचार बनाकर विक्रय करती थी। लेकिन आज बदलते दौर में बाजार में बने रहने के लिए बाजार के मांग के अनुरूप उत्पाद का चयन करना आवश्यक हो गया है। जिला प्रशासन और बिहान के मार्गदर्शन से बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत खल्लारी क्लस्टर के भीमखोज में जय मां शीतला महिला समूह की सदस्य पद्मा साहू ने रेडिमेड कपड़े की दुकान फैशन जोन खोलकर बाजार में सीधे प्रवेश की है। आज उनका फैशन जोन दुकान केवल एक रेडीमेड कपड़ा दुकान नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए सफलता का सशक्त उदाहरण बन चुका है। अभी प्रतिदिन लगभग 4 से 5 हजार रुपए का विक्रय हो रहा है।
भीमखोज के मुख्य सड़क में एक साज-सज्जा सहित फैशन जोन का शो रूम दिखाई देता है। जिनका संचालन महिला सदस्य पद्मा साहू कर रही है। दुकान में आधुनिक रेडीमेड परिधान के साथ-साथ साड़ी, फैंसी आइटम एवं कॉस्मेटिक सामग्री भी उपलब्ध है। सुसज्जित और व्यवस्थित दुकान किसी शो-रूम से कम नहीं दिखती, जिससे ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। इस सफलता के पीछे बिहान योजना और आजीविका मिशन के अंतर्गत जिला प्रशासन की अहम भूमिका रही है। पद्मा साहू को बिहान से समूह के रूप में 1 लाख रुपये तथा बाद में 60 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। व्यवसाय की शुरुआत उन्होंने 1.50 लाख रुपए के ऋण से की। समय पर ऋण चुकाने के बाद उन्होंने व्यवसाय विस्तार के लिए 3 लाख रुपये का ऋण लिया, जिससे कारोबार और मजबूत हुआ। वर्तमान में उनकी दुकान से प्रतिदिन लगभग 5 हजार रुपए तक की बिक्री हो रही है। इस पूरे सफर में परिवार का निरंतर सहयोग उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। हाल ही में यह दुकान आजीविका दुकान के अंतर्गत संचालित की जा रही है।
श्रीमती पद्मा साहू ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे अपनी खुद की इतनी अच्छी दुकान चला पाएगी। उन्होंने बताया कि बिहान योजना और आजीविका मिशन से मिली सहायता ने मुझे आगे बढ़ने का हौसला दिया। शुरुआत में डर था, लेकिन परिवार और समूह की दीदियों के सहयोग से आत्मविश्वास बढ़ा। आज मैं दुकान की मदद से अपनी आजीविका के साथ अपने बच्चों और परिवार के भविष्य को भी बेहतर बना पा रही हूं। मैं चाहती हूं कि हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो और आजीविका मजबूत हो। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा जिले में ऐसी 150 आजीविका दुकान खोलने की तैयारी की जा रही है, जिससे बड़ी संख्या में महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ेंगी और आर्थिक रूप से सशक्त होंगी। वर्तमान में 30 आजीविका दुकानों का संचालन किया जा रहा है।
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