युवान कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने सीखा जल एवं मृदा संरक्षण का महत्व

Update: 2026-06-28 06:10 GMT

बलौदाबाजार। वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर के निर्देशानुसार मृदा एवं जल संरक्षण गतिविधियों के अंतर्गत वर्षा ऋतु में प्राकृतिक वन पुनर्जनन को बढ़ावा देने तथा स्थानीय जनसमुदाय एवं युवाओं को जैव विविधता संरक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से बलौदाबाजार वनमण्डल के विभिन्न वन परिक्षेत्रों में सीड बॉल रोपण, बीज रोपण एवं पर्यावरण जागरूकता गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। इसी क्रम में युवान कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार को विभिन्न वन परिक्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए वन भ्रमण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस अभियान के तहत प्रत्येक वन परिक्षेत्र में ऐसे नालों एवं क्षेत्रों का चयन किया जा रहा है, जहाँ स्थानीय प्रजातियों के बीजों के माध्यम से सीड बॉल रोपण एवं बीज रोपण कर प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा दिया जा सके। साथ ही मिट्टी कटाव वाले क्षेत्रों में स्थानीय घास एवं अन्य उपयुक्त प्रजातियों के रोपण के माध्यम से मृदा एवं जल संरक्षण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन गतिविधियों से युवाओं को जोड़ने के उद्देश्य से प्रत्येक शनिवार को युवान कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है।

बारनवापारा वन परिक्षेत्र के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा 'ब', देवपुर वन परिक्षेत्र के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चंहाट, सोनाखान वन परिक्षेत्र के शासकीय प्राथमिक शाला उपरानी, महकम स्कूल एवं शासकीय हायर सेकेंडरी शाला हटौद, बलौदाबाजार वन परिक्षेत्र के शासकीय हाई स्कूल पंडरिया तथा कोठारी वन परिक्षेत्र के शासकीय प्राथमिक शाला कोठारी में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन गतिविधियों में लगभग 350 से 400 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

वन भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को वन एवं वन्यजीवों का महत्व, जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संतुलन, जल एवं मृदा संरक्षण तथा मानव जीवन में वनों की उपयोगिता के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही उन्हें बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके छोटे-छोटे प्रयास भी प्रकृति संरक्षण में बड़ा योगदान दे सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को स्थानीय फलदार एवं उपयोगी प्रजातियों के सीड बॉल रोपण की जानकारी दी गई तथा उनके महत्व से अवगत कराया गया। साथ ही औषधीय एवं उपयोगी पौधों की पहचान, उनके उपयोग तथा प्राकृतिक वन पुनर्जनन की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी साझा की गई।

विद्यार्थियों को मृदा कटाव के कारणों एवं उसके रोकथाम के उपायों की जानकारी देते हुए बताया गया कि अधिक से अधिक वृक्षारोपण एवं स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण जल एवं मृदा संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर विद्यार्थियों को सीड बॉल वितरित कर उनके रोपण की विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया। सभी विद्यार्थियों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनकी देखभाल करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

वनमण्डल में लगातार आयोजित हो रहे इस युवान कार्यक्रमों को लेकर वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि युवान कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को प्रकृति से परिचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें जल, मृदा एवं जैव विविधता संरक्षण की व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही भविष्य के प्रकृति संरक्षक हैं और उनकी सक्रिय सहभागिता से वन संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को और अधिक मजबूती मिलेगी।

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