जवाहर नवोदय विद्यालय बोरई में छात्रों से मारपीट का आरोप, दो शिक्षक गिरफ्तार

छग

Update: 2026-02-24 18:37 GMT
Durg. दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय बोरई में छात्रों के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। परिजनों के आरोपों के अनुसार, मोबाइल फोन रखने के कारण विद्यालय के 8 से 9 विद्यार्थियों की शिक्षकों द्वारा बेरहमी से पिटाई की गई, जिससे कुछ छात्रों को अंदरूनी चोटें आईं। मामले की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपित शिक्षकों को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक, यह घटना 21 फरवरी को हुई बताई जा रही है। पीड़ित छात्रों में कक्षा 10वीं से 12वीं तक के
विद्यार्थी
शामिल हैं। छात्र के पिता डोमन देशलहरा ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उनके बेटे ने फोन पर जानकारी दी कि मोबाइल रखने के मुद्दे पर उसे और उसके साथियों को वाइस प्रिंसिपल के कमरे में बुलाया गया। वहां पोस्ट ग्रेजुएट टीचर पीयूष कुमार और पीटी शिक्षक रविशंकर मंडलोई ने लकड़ी के डंडे, हाथ-मुक्कों और लात से मारपीट की। परिजनों का आरोप है कि मारपीट के दौरान एक छात्र के प्राइवेट पार्ट पर जूता पहनकर लात मारी गई।


जिससे सूजन और दर्द की स्थिति उत्पन्न हुई। इसके अलावा, अन्य छात्रों को भी डंडे और घूंसों से पीटने की बात कही गई है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान शिक्षकों द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। बताया गया कि घटना के बाद छात्रों ने 22 फरवरी की रात अपने घर फोन कर परिजनों को जानकारी दी। अगले दिन 23 फरवरी को छात्र के पिता विद्यालय पहुंचे और प्रिंसिपल शंकर प्रसाद से घटना के संबंध में पूछताछ की, लेकिन उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार किया। परिजनों ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना अनुमति मोबाइल रखने पर इस तरह की शारीरिक सजा देना अनुचित और अमानवीय है। मामले की शिकायत पहले नगपुरा पुलिस चौकी में दर्ज कराई गई थी। जांच के बाद थाना पुलगांव पुलिस ने
आरोपित
शिक्षकों के खिलाफ अपराध दर्ज कर पोस्ट ग्रेजुएट टीचर पीयूष कुमार (41) और पीटी शिक्षक रविशंकर मंडलोई (54) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि मामले में विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है और अन्य तथ्यों की भी जांच जारी है। घटना को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। परिजनों ने दोषी शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, शिक्षा संस्थान में छात्रों की सुरक्षा और अनुशासन के तरीकों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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