प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने केन्द्रीय जेल दुर्ग का किया निरीक्षण
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Durg. दुर्ग। मुख्यालय स्थित केन्द्रीय जेल दुर्ग का 29 दिसंबर को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिला दुर्ग द्वारा विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने जेल में निरुद्ध बंदियों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, भोजन व्यवस्था एवं स्वच्छता सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण का उद्देश्य जेल में बंद कैदियों के अधिकारों की रक्षा, उनके मामलों की अद्यतन स्थिति तथा मानवीय दृष्टिकोण से उनकी एवं उनके परिवारों की समस्याओं को समझना रहा। निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने विशेष रूप से महिला प्रकोष्ठ का अवलोकन किया। यहां उन्होंने निरुद्ध महिला बंदियों से सीधे संवाद कर उनके प्रकरणों की वर्तमान स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई एवं स्वच्छता व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली। महिला बंदियों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी जाना कि उन्हें जेल प्रशासन की ओर से आवश्यक सुविधाएं समय पर मिल रही हैं या नहीं।
इसके पश्चात उन्होंने जेल में सजायाफ्ता बंदियों के अपील संबंधी प्रकरणों की समीक्षा करते हुए जेल अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे सभी मामलों को शीघ्र अद्यतन किया जाए और संबंधित बंदियों को उनके प्रकरण की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंदियों को अपने कानूनी अधिकारों एवं मामलों की जानकारी मिलना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे न्यायिक प्रक्रिया को समझ सकें। प्रधान जिला न्यायाधीश ने बंदियों से प्रत्यक्ष संवाद कर उनकी व्यक्तिगत एवं सामूहिक समस्याओं को भी सुना। उन्होंने बंदियों की दैनिक दिनचर्या, भोजन, स्वास्थ्य, मनोरंजन एवं अन्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। नव आगंतुक बंदियों को उनके प्रकरण से संबंधित जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जो बंदी निजी अधिवक्ता नियुक्त करने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाएगी तथा उनके प्रकरणों की पैरवी के लिए निःशुल्क अधिवक्ता नियुक्त किए जाएंगे।
निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन को यह भी निर्देश दिए गए कि जिन बंदियों को परिहार अथवा अन्य कानूनी लाभ दिया जा सकता है, उनके आवेदनों के लंबित रहने के कारणों की विस्तृत जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रेषित की जाए, ताकि समय पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की महत्वाकांक्षी योजना SPRUHA (Supporting Potential and Resilience of the Unseen, Held-back and Affected) 2025 के अंतर्गत जेल में निरुद्ध कैदियों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने कैदियों से यह जानकारी प्राप्त की कि उनके कारावास की अवधि के दौरान उनके आश्रित परिवारजनों — जैसे पत्नी, बच्चे एवं वृद्ध माता-पिता — को किन सामाजिक, आर्थिक एवं व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कैदियों ने आजीविका, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य उपचार, भरण-पोषण एवं दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति से जुड़ी समस्याओं को सामने रखा। इस पर प्रधान जिला न्यायाधीश ने निर्देश दिए कि SPRUHA योजना के अंतर्गत ऐसे पात्र कैदियों एवं उनके आश्रित परिवारजनों की पहचान कर उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उन्हें केंद्र एवं राज्य शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि पैरालीगल वालेंटियर्स के माध्यम से आश्रित परिवारों का फील्ड स्तर पर सत्यापन कर उनकी समस्याओं के समाधान हेतु संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि कैदियों के परिवारजनों को सामाजिक सुरक्षा एवं संरक्षण प्रदान किया जा सके। निरीक्षण के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के सचिव, विधि अधिकारी, प्रभारी उप जेल अधीक्षक, महिला प्रकोष्ठ प्रभारी, एलएडीसीएस के काउंसिल एवं अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।