हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया

छत्तीसगढ़.

Update: 2025-10-11 06:13 GMT
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़क हादसों में लगातार हो रही मौतों पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए राज्य सरकार और जिम्मेदार विभागों को कड़ी फटकार लगाई है। कोरबा जिले में सिर्फ एक माह में 200 लोगों की मौत होने की खबर पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। इसे लेकर उद्योग सचिव, आरटीओ कोरबा और अन्य संबंधित अधिकारियों से शपथपत्र पर विस्तृत जवाब मांगा गया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति ए. के. प्रसाद की द्वैतीय पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि लगातार सड़क हादसे बढ़ रहे हैं, पर प्रशासनिक कार्रवाई न के बराबर है। कोर्ट ने कहा कि भारी वाहनों पर नियंत्रण की कमी और खराब सड़कों की स्थिति आम जनता की जान के लिए खतरा बन चुकी है।
कोर्ट कमिश्नर अपूर्व त्रिपाठी और रविंद्र शर्मा ने रिपोर्ट में बताया कि केवल जुलाई माह में ही कोरबा जिले में 200 लोगों की जान हादसों में चली गई। ट्रक और हाइवा जैसे भारी वाहन सड़क किनारे बेतरतीब खड़े रहते हैं, जिससे हादसे बढ़ रहे हैं। एनएच 130 पर तीन किलोमीटर लंबी ट्रक कतार की स्थिति भी अदालत के समक्ष रखी गई।
हाईकोर्ट ने राख और कोयला परिवहन को लेकर उद्योग विभाग को भी निगरानी बढ़ाने को कहा गया है।
इससे पहले की गई सुनवाई में अदालत ने कहा था कि खराब सड़कों के लिए पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई जिम्मेदार हैं। विभागों को आदेश दिया गया था कि वे सुधारात्मक कदम जल्द उठाएं। पीडब्ल्यूडी सचिव ने बताया था कि अंबिकापुर–रामगढ़वा रोड (एनएच-343) के सुधार के लिए 740 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन बरसात के कारण काम रुका हुआ है।
यह जनहित याचिका तब भी दर्ज हुई थी जब ब्रेक फेल होने से 19 लोगों की मौत वाले हादसे की खबरें मीडिया में आईं। इसके बाद कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर राज्यभर की सड़कों की स्थिति पर निगरानी शुरू की। अब अदालत ने कहा है कि इस मामले की नियमित मॉनिटरिंग होगी। अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
Tags:    

Similar News