Bijapur. बीजापुर। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति अब नक्सल हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम दे रही है। पूर्व नक्सली जिन लोगों ने हिंसा और नक्सली विचारधारा को त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटना चुना है, उन्हें न केवल स्थायी आवास दिए जा रहे हैं, बल्कि गांव में सम्मानजनक रोजगार और आजीविका के अवसर भी मिल रहे हैं। ऐसी ही प्रेरक कहानी बीजापुर जिले के एक सुदूर ग्रामीण क्षेत्र से सामने आई है। संदीप, जिनके हाथों में ईंट जुड़ाई और मिस्त्री का हुनर है, पहले इस कौशल का उपयोग केवल नक्सली स्मारक बनाने तक ही सीमित था। लेकिन आत्मसमर्पण के बाद उनके हुनर को नई दिशा मिली। उन्होंने अपने प्रधानमंत्री आवास का निर्माण स्वयं किया और आज वे गांव में अन्य आवासों के निर्माण में राजमिस्त्री के रूप में काम कर रहे हैं। बीते एक वर्ष में इस काम से उन्होंने लगभग 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की है।
संदीप ने बताया कि वे वर्ष 2017 में संगम सदस्य के रूप में नक्सली संगठन से जुड़े थे। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने आत्मसमर्पण किया। शुरुआत में उनका नाम आवास सूची में नहीं था, लेकिन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की विशेष परियोजना की मदद से आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उन्हें वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की स्वीकृति मिली। संदीप का कहना है कि उन्हें पहले से ही ईंट जोड़ाई का अनुभव था, इसलिए उन्होंने अपने आवास का निर्माण स्वयं किया। जैसे-जैसे घर आकार ले रहा था, उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता गया। आज उनका आवास पूर्ण हो चुका है और इसे देखकर उन्हें गर्व और संतोष की अनुभूति होती है।
संदीप के हुनर और कार्य को देखकर गांव के अन्य प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही भी अपने आवास निर्माण का कार्य उन्हें सौंपने लगे हैं। वर्तमान में वे गांव के चार अन्य हितग्राहियों के घर निर्माण में लगे हुए हैं। इस कार्य से उन्होंने अब तक लगभग 30 हजार रुपये की आय अर्जित की है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और RSETI की पहल ने इस प्रक्रिया को और मजबूत बनाया है। जिला प्रशासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को RSETI के माध्यम से राजमिस्त्री प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे हितग्राही न केवल अपने आवास का निर्माण स्वयं कर सकते हैं, बल्कि अन्य आवासों का निर्माण कर अपनी आजीविका सुनिश्चित कर सकते हैं।
यह पहल न केवल पूर्व नक्सलियों को कौशल प्रशिक्षण देती है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करती है। संदीप जैसे लोग इस योजना का लाभ लेकर अपने हुनर को रोजगार का साधन बना रहे हैं। भविष्य में उन्हें ऋण सुविधा और तकनीकी ज्ञान भी प्रदान किया जाएगा, जिससे वे अपने व्यवसाय और रोजगार को और सुदृढ़ कर सकेंगे। यह कहानी यह साबित करती है कि नक्सली हिंसा से प्रभावित व्यक्तियों को सही दिशा और समर्थन मिलने पर वे समाज की मुख्यधारा में लौट सकते हैं और खुद की और अपने परिवार की बेहतरी सुनिश्चित कर सकते हैं। बीजापुर जिले में संदीप का यह सफर कई अन्य युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन रहा है।