दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में आयोजित हुआ क्षेत्रीय संरक्षा संगोष्ठी

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Update: 2026-07-27 14:21 GMT
Bilaspur/Raipur. बिलासपुर/रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय, बिलासपुर स्थित न्यू ऑडिटोरियम हॉल में आज दिनांक 27 जुलाई 2026 को प्रातः 10:00 बजे से सायंकाल 07:00 बजे तक क्षेत्रीय संरक्षा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। रेलवे में संरक्षित, विश्वसनीय एवं निर्बाध रेल संचालन सुनिश्चित करने तथा संरक्षा संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस संगोष्ठी में तरुण प्रकाश, महाप्रबंधक, प्रधान मुख्य संरक्षा अधिकारी अनूप सतपथी, सभी प्रमुख विभागाध्यक्ष, तीनों रेल मंडलों बिलासपुर, रायपुर एवं नागपुर के मंडल रेल प्रबंधक, मुख्यालय एवं मंडलों के अधिकारी, वरिष्ठ पर्यवेक्षक, सभी सेफ्टी काउंसलर्स तथा विभिन्न विभागों के रेल कर्मचारियों ने भाग लिया। संरक्षा संगोष्ठी के प्रारंभ में सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा गया कि रेलवे में संरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक कर्मचारी की कार्य संस्कृति, अनुशासन एवं सतर्कता से जुड़ी सतत प्रक्रिया है। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि ऐसे संरक्षा सेमिनार विभिन्न विभागों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान तथा सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों को साझा करने का प्रभावी मंच प्रदान करते हैं, जिससे संरक्षित एवं निर्बाध रेल संचालन को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकता है।
अपने संबोधन में महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने कहा कि रेलवे में संरक्षा केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अधिकांश दुर्घटनाएँ बड़ी तकनीकी विफलताओं के कारण नहीं, बल्कि छोटी-छोटी चूकों, नियमों की अनदेखी, निरीक्षण में कमी अथवा क्षणिक असावधानी के कारण होती हैं। इसलिए दुर्घटनाओं के बाद समीक्षा करने के साथ-साथ संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर उनका प्रभावी निराकरण करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें निरंतर सीखते रहना होगा। सीखना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि पूर्ण लगन, समर्पण एवं गंभीरता के साथ होना चाहिए। प्रत्येक अनुभव, प्रत्येक निरीक्षण तथा प्रत्येक प्रशिक्षण से सीख लेकर उसे व्यवहार में उतारना ही संरक्षा संस्कृति को सुदृढ़ बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
महाप्रबंधक ने कहा कि “यदि कोई कार्य सुरक्षित ढंग से नहीं किया जा सकता, तो वह कार्य सही ढंग से किया ही नहीं जा सकता।” उन्होंने अधिकारियों एवं पर्यवेक्षकों से कार्यस्थलों पर नियमित सेफ्टी काउंसलिंग, असुरक्षित परिस्थितियों की तत्काल रिपोर्टिंग तथा कर्मचारियों के सतत प्रशिक्षण एवं कौशल विकास पर विशेष बल देने का आह्वान किया। उन्होंने आधुनिक तकनीकों एवं स्वचालित प्रणालियों के प्रभावी उपयोग के साथ-साथ संरक्षा व्यवहार को भी समान महत्व देने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रातः 10:00 बजे प्रारंभ हुआ यह क्षेत्रीय संरक्षा संगोष्ठी सायंकाल 07:00 बजे तक दो तकनीकी सत्रों में आयोजित किया गया। दोनों सत्रों के दौरान इंजीनियरिंग, परिचालन, सिग्नल एवं दूरसंचार, विद्युत तथा मैकेनिकल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं रेल कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े तथ्यों, अनुभवों, चुनौतियों तथा सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों को साझा किया। प्रतिभागियों ने संरक्षा से संबंधित वास्तविक घटनाओं का विश्लेषण करते हुए दुर्घटना निवारण, जोखिम प्रबंधन तथा बेहतर समन्वय के लिए उपयोगी सुझाव भी प्रस्तुत किए।
संगोष्ठी में इंजीनियरिंग विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण, मानक सामग्री के उपयोग, उचित डिज़ाइन एवं कार्य-योजना, रेल दोषों की समय पर पहचान हेतु यूएसएफडी परीक्षण, ट्रैक, पुल एवं टर्नआउट के वैज्ञानिक अनुरक्षण तथा ज्यामितीय मानकों के पालन पर प्रस्तुति दी गई। साथ ही यह बताया गया कि दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं संरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक ट्रैक मशीनों द्वारा ट्रैक अनुरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे अनुरक्षण कार्यों की गुणवत्ता, सटीकता एवं दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग ने प्वाइंट मशीनों के निवारक अनुरक्षण, कार्यों के दौरान संरक्षा प्रोटोकॉल के अनुपालन तथा सिग्नलिंग प्रणाली एवं सेफ्टी इंटरलॉकिंग की विश्वसनीयता बनाए रखने पर विस्तार से जानकारी दी। मैकेनिकल विभाग ने हॉट एक्सल बॉक्स डिटेक्टर अलर्ट पर त्वरित कार्रवाई, ट्रेन पार्टिंग की रोकथाम, ट्रेनों में अग्नि सुरक्षा प्रबंधन तथा रोलिंग स्टॉक की नियमित जाँच एवं फिटनेस सुनिश्चित करने के उपायों पर प्रकाश डाला।
विद्युत विभाग ने सिग्नल पास्ड एट डेंजर (SPAD) की रोकथाम, सहायक लोको पायलट द्वारा आरएस वाल्व के प्रभावी संचालन, बैंकिंग क्रू की संरक्षित कार्यप्रणाली, विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव, ओएचई संरक्षा तथा ट्रेन व्हिसल के निर्धारित कोड के पालन की महत्ता पर विस्तृत जानकारी दी। परिचालन विभाग ने संरक्षित एवं समयबद्ध रेल संचालन, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। महाप्रबंधक तरुण प्रकाश के निर्देशन एवं प्रधान मुख्य संरक्षा अधिकारी अनूप सतपथी के नेतृत्व में आयोजित इस क्षेत्रीय संरक्षा संगोष्ठी के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं रेल कर्मियों के मध्य संरक्षा संबंधी विषयों पर सार्थक पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया। प्रतिभागियों ने अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए संरक्षित रेल संचालन, जोखिम प्रबंधन तथा कार्यस्थल पर संरक्षा संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए उपयोगी सुझाव प्रस्तुत किए। संगोष्ठी के समापन सत्र में सभी विभागों के प्रधान विभागाध्यक्षों द्वारा विभिन्न तकनीकी प्रस्तुतियों एवं संरक्षा उपायों पर विस्तृत पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें विभागों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग, जोखिमों के समयबद्ध निराकरण तथा सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों को अपनाने पर विशेष बल दिया गया।
आयोजित संरक्षा संगोष्ठी के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि उच्च गुणवत्ता वाला निर्माण, वैज्ञानिक अनुरक्षण, समय पर निरीक्षण, आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग, मानक कार्य-पद्धतियों का पालन तथा सभी विभागों के बीच सुदृढ़ समन्वय ही संरक्षित रेल संचालन एवं दुर्घटनाओं की रोकथाम का मूल आधार है। अपने संबोधन के समापन पर महाप्रबंधक ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे प्रत्येक कार्य निर्धारित नियमों के अनुरूप करेंगे, किसी भी असुरक्षित स्थिति की अनदेखी नहीं करेंगे, अधीनस्थ कर्मचारियों को संरक्षा के प्रति निरंतर जागरूक करेंगे तथा स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में संरक्षा संस्कृति को और अधिक सशक्त बनाएंगे। उन्होंने महात्मा गांधी के विचार “भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि आज हम क्या करते हैं” का उल्लेख करते हुए कहा कि आज अपनाई गई संरक्षित कार्य संस्कृति ही भविष्य में यात्रियों, कर्मचारियों और रेलवे की संरक्षा सुनिश्चित करेगी।
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