Mahasamund. महासमुंद। विष्णुदेव साय ने कहा है कि नक्सल-मुक्त बस्तर का सपना अब साकार होता दिखाई दे रहा है और विकसित-सुरक्षित छत्तीसगढ़ तेजी से आकार ले रहा है। यह बयान महासमुंद जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय 15 सशस्त्र माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद आया है, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। जानकारी के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले 15 माओवादियों में 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं। इन पर कुल 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था। ये सभी लंबे समय से सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय थे और विभिन्न घटनाओं में संलिप्त रहे हैं। आत्मसमर्पण के दौरान उन्होंने अत्याधुनिक हथियार भी सुरक्षा बलों के समक्ष जमा कराए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि भटके हुए युवा अब लोकतंत्र, विकास और शांति की राह पर लौटना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के सतत प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था स्थापित करना नहीं, बल्कि प्रभावित युवाओं को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन देना है। सीएम साय ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दोहराया कि भयमुक्त और विकसित-सुरक्षित छत्तीसगढ़ बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प है।
सरकार द्वारा आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास नीति के तहत आवश्यक सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण की इस प्रक्रिया से अन्य सक्रिय माओवादियों को भी मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिलेगी। महासमुंद और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे माओवादी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगा है। प्रशासन का मानना है कि विकास कार्यों, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से भी नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों में विश्वास बहाली हो रही है। इस आत्मसमर्पण को छत्तीसगढ़ में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि संवाद, सुरक्षा और विकास की त्रिस्तरीय रणनीति के माध्यम से प्रदेश को नक्सलवाद से पूर्णत: मुक्त करने का प्रयास जारी रहेगा।