अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज ने मनाया शक्ति दिवस, मंतूराम पवार हुए शामिल
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Gadchiroli. गढ़चिरौली। अखिल भारतीय राष्ट्रीय महासभा हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज द्वारा 26 दिसंबर को शक्ति दिवस का आयोजन पूरे श्रद्धा और सामाजिक एकता के साथ किया गया। इस अवसर पर समाज के जिला, ब्लॉक एवं गढ़ स्तर के पदाधिकारी एवं सदस्य संगठित होकर पारंपरिक सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार आराध्य देवी मांई दंतेश्वरी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक आस्था और वीर शहीदों की स्मृति को जीवंत बनाए रखना रहा।
शक्ति दिवस समारोह के दौरान समाज के प्रमुख मंतुराम पवार ने कहा कि हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज सदियों से अपनी संस्कृति, परंपरा और देवी-देवताओं की आस्था के साथ देश और समाज के लिए बलिदान देता आया है। उन्होंने कहा कि शक्ति दिवस केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, आत्मबल और ऐतिहासिक चेतना का प्रतीक है। कार्यक्रम में परलकोट के प्रथम शहीद राजा शिरोमणि शहीद गेंदसिंह को विशेष रूप से स्मरण किया गया। समाज के लोगों ने उन्हें देश का प्रथम शहीद बताते हुए उनकी वीरता, संघर्ष और बलिदान को नमन किया। इसके साथ ही सभी स्वतंत्रता सेनानियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिन्होंने देश की आज़ादी और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज की पीढ़ी को अपने इतिहास, शहीदों और सांस्कृतिक मूल्यों को जानना और समझना अत्यंत आवश्यक है। इससे समाज में आत्मगौरव की भावना पैदा होती है और युवाओं को सही दिशा मिलती है। पूजा-अर्चना के साथ पारंपरिक ढंग से समाज की समृद्धि, शांति और देश की खुशहाली की कामना की गई। शक्ति दिवस के अवसर पर समाज की ओर से देश और प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम का समापन “जय जोहार” के उद्घोष के साथ हुआ। आयोजन में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और सभी ने इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक आयोजन बताया।