Raipur. रायपुर। नए साल के पहले दिन राज्य मंत्रालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया, जब यह खबर फैल गई कि राज्य संवर्ग कर्मियों के सालाना कैजुअल लीव (सीएल) में कटौती कर दी गई है। बताया गया कि सालाना 13 दिनों के सीएल में 5 दिनों की कटौती की गई है। यह जानकारी ई-एचआर ऑफिस पोर्टल पर भी दिखने लगी थी, जिससे कर्मचारियों में चिंता और अफवाह फैल गई। जैसे ही पोर्टल पर यह डिस्प्ले देखा गया, कर्मचारियों ने जीएडी (महानिदेशालय प्रशासन) कार्यालय की ओर दौड़ लगानी शुरू कर दी। साथ ही यह खबर मैदानी अमले तक भी पहुंच गई, जो अपने-अपने विभागों में साथी कर्मियों से कन्फर्मेशन लेने में जुट गए। कर्मचारियों की यह चिंता यह दर्शाती है कि छुट्टियों और अवकाश व्यवस्था में बदलाव की सूचना कर्मचारियों के लिए कितनी संवेदनशील विषय है।
राज्य मंत्रालय में कर्मचारियों की वर्तमान अवकाश व्यवस्था के अनुसार, पर्समिन में 15 ईएल, 8 सीएल, 2 ऐच्छिक अवकाश और 10 हाफ-पे लीव निर्धारित है। यदि कोई विभाग मंत्रालय, पीएसयू, राज्य शासन या स्वशासी संस्थाओं में अलग अवकाश व्यवस्था अपनाता है, तो उसे ऑनलाइन सिस्टम में पृथक अवकाश मेनू बनाने की सुविधा भी उपलब्ध है। इस पूरे मामले की जांच और कर्मचारियों की बढ़ती चिंता को देखते हुए जीएडी ने जल्द ही स्थिति स्पष्ट की। जीएडी ने बताया कि यह भ्रमित स्थिति तकनीकी कारणों से उत्पन्न हुई थी। दरअसल, डीओपीटी के पर्समिन विभाग के लिए अवकाश प्रबंधन (लीव मेनेजमेंट) कॉलम को छत्तीसगढ़ जीएडी के सॉफ़्टवेयर में अपलोड किया गया था। इस अपलोडिंग के कारण ई-एचआर पोर्टल पर गलत डिस्प्ले दिखाई देने लगी, जिसे कर्मचारियों ने सीएल कटौती के रूप में समझ लिया।
जीएडी ने यह भी बताया कि कर्मचारियों के सीएल में कोई कटौती नहीं की गई है। सभी कर्मचारियों को उनकी वर्तमान अवकाश नीति के अनुसार 13 सीएल, 15 ईएल, 2 ऐच्छिक अवकाश और 10 हाफ-पे लीव ही उपलब्ध हैं। यह स्पष्ट करते हुए जीएडी ने कर्मचारियों से अपील की कि ऐसी तकनीकी अपलोडिंग और पोर्टल डिस्प्ले में भ्रम होने पर आधिकारिक सूचना का ही पालन करें, अफवाहों पर विश्वास न करें। इस घटना ने यह संकेत दिया कि सॉफ़्टवेयर अपडेट और पोर्टल पर तकनीकी बदलाव कर्मचारियों के बीच भ्रम और असमंजस पैदा कर सकते हैं। मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी अपडेट या बदलाव की सूचना पहले कर्मचारियों को आधिकारिक रूप से दी जाएगी, ताकि ऐसे भ्रम से बचा जा सके। राज्य कर्मचारियों के लिए अवकाश नीति संवेदनशील मुद्दा होने के कारण जीएडी ने इस स्थिति को तत्काल नियंत्रण में लिया और अधिकारियों तथा कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि किसी भी तरह की कटौती या बदलाव का निर्णय केवल आधिकारिक आदेशों के माध्यम से लिया जाएगा।