Durg. दुर्ग। दुर्ग जिले में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। काउंसलिंग के उपरांत 366 शिक्षकों को पदांकित किया गया, जबकि 17 शिक्षकों ने पदभार ग्रहण नहीं किया। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि अतिरिक्त शिक्षकों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
युक्तियुक्तकरण और काउंसलिंग की प्रक्रिया
जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार मिश्रा से मिली जानकारी के अनुसार दुर्ग जिले में युक्तियुक्तकरण और काउंसलिंग के बाद कुल 631 अतिरिक्त शिक्षकों की पहचान की गई थी। इनमें विभिन्न श्रेणियों के शिक्षक शामिल थे—86 व्याख्याता, 1 प्राचार्य, 329 शिक्षक, 6 प्रधान पाठक और 209 सहायक शिक्षक। काउंसलिंग प्रक्रिया संपन्न होने के बाद कुल 366 शिक्षकों को पदांकित कर उनकी नियुक्ति सुनिश्चित की गई है। इसमें 75 व्याख्याता, 1 प्राचार्य, 75 शिक्षक, 6 प्रधान पाठक और 209 सहायक शिक्षक शामिल हैं।
पदभार नहीं लेने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई
जांच में यह भी सामने आया कि 17 शिक्षकों ने नियुक्ति के बावजूद पदभार ग्रहण नहीं किया। इनमें 2 व्याख्याता, 6 शिक्षक, 2 प्रधान पाठक और 7 सहायक शिक्षक शामिल हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि ऐसे शिक्षकों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। साथ ही उन्हें अकार्य दिवस घोषित करते हुए पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है ताकि नियुक्ति प्रक्रिया बाधित न हो।
प्रशासन की मंशा और आगे की योजना
शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण जिले में शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाने के लिए किया गया है। अतिरिक्त शिक्षकों की पहचान कर उन्हें आवश्यक पदों पर पदांकित किया गया ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि पदभार ग्रहण न करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही काउंसलिंग और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेजों की समीक्षा की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों से अपील की है कि वे समय पर पदभार ग्रहण करें और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें। साथ ही उन्होंने कहा कि जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन सतत प्रयासरत रहेगा।
शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव
यह युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया न केवल शिक्षकों की संख्या को संतुलित करती है बल्कि स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और कार्यक्षमता भी सुनिश्चित करती है। अतिरिक्त शिक्षकों की पहचान कर उनकी नियुक्ति से शिक्षा संस्थानों में कार्यभार का वितरण बेहतर होगा। वहीं, अनुपस्थित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई से अनुशासन कायम रहेगा। शिक्षा विभाग ने कहा है कि आगे भी ऐसे मामलों पर सख्ती बरती जाएगी ताकि छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो।