Raipur Breaking: मंदिर हसौद में जिला प्रशासन ने रुकवाया बाल विवाह

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Update: 2025-06-09 15:42 GMT
Raipur. रायपुर। जिले के मंदिर हसौद थाना क्षेत्र से एक सराहनीय पहल सामने आई है, जहां प्रशासन की तत्परता और सक्रियता से एक नाबालिग बालिका का विवाह रुकवाया गया। इस गंभीर मामले की सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर बाल विवाह की कोशिश को विफल कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक नाबालिग बालिका के विवाह की तैयारी की गोपनीय सूचना जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर को मिली थी। इसके बाद तत्काल जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम में जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थागत देखरेख), सामाजिक कार्यकर्ता, बाह्य पहुंच कार्यकर्ता, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी सह पर्यवेक्षक, महिला एवं बाल विकास विभाग, एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के राज्य समन्वयक और मंदिर हसौद थाना पुलिस बल के अधिकारी शामिल थे।

संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और विवाह की तैयारियों को तत्काल प्रभाव से रुकवाया। परिजनों को न केवल बाल विवाह की गंभीरता समझाई गई, बल्कि उनसे लिखित शपथ पत्र भी लिया गया जिसमें उन्होंने बालिका की वैवाहिक आयु पूर्ण होने तक विवाह न कराने का वचन दिया। इस कार्रवाई के दौरान पंचनामा तैयार कर सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को भी पूरा किया गया। टीम ने मौके पर उपस्थित ग्रामीणों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की विस्तृत जानकारी दी और उन्हें यह बताया कि यह कानून किस प्रकार नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। उन्हें यह भी अवगत कराया गया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसके लिए दोषियों को सज़ा भी हो सकती है। बाल विवाह के खिलाफ इस सफल कार्रवाई से यह साफ हो गया है।

जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग बच्चों के अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर और सजग हैं। टीम ने सभी ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र में किसी भी प्रकार के बाल विवाह की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन या महिला एवं बाल विकास विभाग को दें, ताकि समय रहते हस्तक्षेप किया जा सके। यह कार्रवाई सामाजिक जागरूकता और बाल अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बाल विवाह केवल एक कुप्रथा ही नहीं, बल्कि यह बच्चों के भविष्य और उनकी स्वतंत्रता के खिलाफ एक गंभीर
अपराध
है। ऐसे में प्रशासन का यह प्रयास निश्चित रूप से प्रशंसा के योग्य है और समाज के लिए प्रेरणादायी भी। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए कि इस तरह की और भी सतर्क निगरानी की जाएगी और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लगातार अभियान जारी रहेगा। समाज के सभी वर्गों, विशेषकर अभिभावकों और पंच-सरपंचों से अपील की गई है कि वे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ न करें और उन्हें शिक्षा व सुरक्षा का अधिकार दें।
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