Mahasamund. महासमुंद। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत रबी वर्ष 2025-26 के लिए दलहन और तिलहन फसलों की खरीदी का शुभारंभ महासमुंद जिले में किया गया। जिले के तीन प्रमुख उपार्जन केंद्रों में इस योजना के तहत खरीदी प्रक्रिया शुरू हुई, जहां बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर पहुंचे। कृषि उपज मंडी पिटियाझर, महासमुंद में कार्यक्रम के दौरान ग्राम घोड़ारी के किसान खोरबाहरा निषाद द्वारा 7 क्विंटल सरसों बीज की बिक्री की गई। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर चंद्राकर, उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप, जिला नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा, अनुविभागीय अधिकारी गणेश्वरी बंजारे सहित अन्य अधिकारी और किसान मौजूद रहे।
इसी तरह बसना कृषि उपज मंडी में ग्राम दलदली के किसान मोहन नायक द्वारा 15 क्विंटल सरसों बीज का उपार्जन किया गया। यहां पर भी जनप्रतिनिधियों और सहकारी समिति के पदाधिकारियों की उपस्थिति रही। सरायपाली मंडी में भी किसानों ने भागीदारी दिखाई, जहां ग्राम कुटेला के पंकज राज पटेल ने 1.5 क्विंटल और ग्राम केना के सागरचंद पटेल ने 1 क्विंटल सरसों बीज की बिक्री की। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष मोगरा पटेल, जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रकाश पटेल, कृषि सभापति बालमोती पटेल सहित कई जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। अधिकारियों ने किसानों को समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
खरीदी केंद्रों पर सरसों की गुणवत्ता जांच, तौल और भुगतान प्रक्रिया का निरीक्षण भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि चना का समर्थन मूल्य 5875 रुपये प्रति क्विंटल, मसूर का 7000 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों का 6200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। किसानों को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से खरीदी सुनिश्चित करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। जिले में कुल 6 उपार्जन केंद्र पिटियाझर, सिर्रीपठारीमुड़ा, कोमाखान, पिथौरा, बसना और सरायपाली के माध्यम से खरीदी की व्यवस्था की गई है। इन केंद्रों के जरिए अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है।
उप संचालक कृषि ने बताया कि ई-समृद्धि पोर्टल पर दलहन और तिलहन फसलों के पंजीयन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 20 अप्रैल 2026 कर दिया गया है। किसानों से अपील की गई है कि वे समय रहते अपना पंजीयन कराकर समर्थन मूल्य का लाभ लें। इस योजना के तहत किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और उनकी आय में वृद्धि करने का प्रयास किया जा रहा है। शासन द्वारा लगातार ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं ताकि किसानों को बाजार की अनिश्चितता से बचाया जा सके और उन्हें स्थिर आय मिल सके। खरीदी केंद्रों में किसानों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि योजना का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। प्रशासन ने भरोसा जताया है कि आने वाले दिनों में और अधिक किसान इस योजना से जुड़ेंगे और इसका लाभ उठाएंगे।