Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस के ‘साइबर जागृति अभियान’ के द्वितीय सप्ताह के तहत बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से ग्राहकों को साइबर अपराध एवं वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसी कड़ी में थाना मौदहापारा क्षेत्र स्थित लीड बैंक रायपुर, बैंक ऑफ बड़ौदा की मेन ब्रांच में विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस टीम ने बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राहकों से सीधे संवाद कर ऑनलाइन ठगी से बचने के जरूरी उपाय बताए।
बैंक ग्राहकों को साइबर ठगी के तरीकों की दी जानकारी
कार्यक्रम का उद्देश्य बैंक के नियमित ग्राहकों को रोजमर्रा की बैंकिंग और डिजिटल लेन-देन के दौरान होने वाले साइबर फ्रॉड के प्रति सतर्क करना था। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। थोड़ी सी लापरवाही के कारण लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा सकते हैं। डीसीपी सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल और डीसीपी नॉर्थ दीपमाला कश्यप के निर्देश पर आयोजित कार्यक्रम में पुलिस टीम ने ग्राहकों को यूपीआई फ्रॉड, फर्जी बैंक कॉल, संदिग्ध मैसेज, क्यूआर कोड, ओटीपी और यूपीआई पिन से जुड़ी धोखाधड़ी के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
बैंक अधिकारी बनकर ठगते हैं साइबर अपराधी
पुलिस ने ग्राहकों को बताया कि साइबर ठग अक्सर बैंक अधिकारी, केवाईसी अधिकारी, पुलिस अधिकारी या किसी प्रतिष्ठित संस्था के कर्मचारी बनकर फोन करते हैं। आरोपी विश्वास में लेकर ग्राहकों से गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि बैंक कभी भी फोन पर ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी या पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगता। इसलिए किसी भी व्यक्ति को ऐसी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। ग्राहकों को यह भी समझाया गया कि किसी व्यक्ति के कहने पर पैसा प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन डालने या अनजान क्यूआर कोड स्कैन करने की जरूरत नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करने के लिए दबाव बनाता है तो सावधान हो जाना चाहिए।
संदिग्ध लिंक और रिमोट एक्सेस ऐप से रहें सावधान
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान पुलिस टीम ने अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने की सलाह दी। साइबर अपराधी कई बार आकर्षक ऑफर, बैंक खाते से संबंधित सूचना, केवाईसी अपडेट या अन्य बहाने से मोबाइल पर लिंक भेजते हैं। पुलिस ने ग्राहकों को किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस एप्लीकेशन डाउनलोड नहीं करने की भी समझाइश दी। ऐसे एप के जरिए ठग मोबाइल स्क्रीन और बैंकिंग गतिविधियों तक पहुंच हासिल कर आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
साइबर फ्रॉड होने पर 1930 पर करें तत्काल शिकायत
कार्यक्रम में साइबर अपराध की स्थिति में ‘गोल्डन ऑवर’ के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। पुलिस ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ आर्थिक साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो उसे घबराने या देर करने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। आर्थिक साइबर फ्रॉड होने पर पीड़ित को बिना समय गंवाए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। इसके साथ ही नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत की जा सकती है। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को रोकने या उसके आगे के हस्तांतरण पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
पुलिस और बैंक के समन्वय से जागरूकता अभियान
कार्यक्रम में डीसीपी नॉर्थ दीपमाला कश्यप के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बैंक अधिकारियों और ग्राहकों के साथ संवाद किया। इस दौरान लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर मोहम्मद मुफीज, बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारी-कर्मचारी, थाना प्रभारी मौदहापारा शक्ति सिंह, पीएसआई जितेंद्र नायक, पीएसआई सुधा श्याम सहित थाना मौदहापारा का स्टाफ मौजूद रहा। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता सबसे प्रभावी हथियार है। बैंकिंग संस्थानों और पुलिस के समन्वय से चलाए जा रहे ‘साइबर जागृति अभियान’ का उद्देश्य जागरूक ग्राहक, सुरक्षित बैंकिंग और सुरक्षित डिजिटल लेन-देन की संस्कृति विकसित करना है।
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