Pali. पाली। राजस्थान के पाली जिले में शुक्रवार को एक फैक्ट्री में हुए दर्दनाक हादसे ने सभी को स्तब्ध कर दिया। सुमेरपुर रोड स्थित वैशाखी नगर मंडली खुर्द की एक फैक्ट्री में काम कर रही 19 वर्षीय दिव्यांग युवती मशीन में फंस गई और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हादसे के वक्त युवती के पिता भी फैक्ट्री में मौजूद थे, जिन्होंने अपनी बेटी को तड़पते देखा, लेकिन मदद करने से पहले ही उसकी जान चली गई। थानाधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि मृतका का नाम दरकश है, जो उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के धुवाला करीम नगर की रहने वाली थी। वह अपने पिता मुन्ना खान, मां और भाई-बहनों के साथ फैक्ट्री परिसर में ही रहती थी। परिवार करीब दो महीने पहले ही इस फैक्ट्री में काम करने आया था।
दरकश जन्म से ही बोल और सुन नहीं सकती थी, लेकिन फिर भी वह अपने पिता के साथ मेहनत में जुटी रहती थी। कुछ दिन पहले से वह फैक्ट्री में लकड़ियों के टुकड़े करने वाली मशीन पर काम करने लगी थी। घटना शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे की है। दरकश रोज की तरह मशीन में लकड़ियां डालने का काम कर रही थी। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह संतुलन खो बैठी। देखते ही देखते उसका पैर मशीन के भीतर चला गया, और फिर पूरा शरीर मशीन में फंस गया। मशीन की तेज धार वाली ब्लेड्स ने कुछ ही पलों में उसका आधा शरीर चीर दिया। चूंकि दरकश दिव्यांग थी और बोल-सुन नहीं सकती थी, इसलिए वह दर्द और डर में भी कोई आवाज नहीं निकाल सकी। मशीन के तेज शोर में किसी को उसकी तकलीफ का अंदाजा तक नहीं हुआ।
थोड़ी ही देर में मशीन से असामान्य आवाज आने लगी। पास ही काम कर रहे उसके पिता मुन्ना खान ने जैसे ही मशीन की ओर देखा, तो उनकी आंखों के सामने दिल दहला देने वाला दृश्य था। उनकी बेटी का शरीर मशीन में फंसा हुआ था और उसका आधा हिस्सा कट चुका था। मुन्ना खान ने तुरंत मशीन को बंद करने की कोशिश की और मदद के लिए लोगों को बुलाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। फैक्ट्री के अन्य कर्मचारियों ने भी मौके पर पहुंचकर मशीन को बंद कराया और दरकश को बाहर निकाला, लेकिन वह दम तोड़ चुकी थी। पुलिस को हादसे की सूचना दी गई, जिसके बाद थाना प्रभारी अनिल कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हादसे की पूरी जांच शुरू कर दी गई है और फैक्ट्री प्रबंधन से भी मशीन की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन नियमों के बारे में पूछताछ की जा रही है।
पिता मुन्ना खान ने बताया कि उसकी छह बेटियां और दो बेटे हैं। दरकश सबसे मेहनती थी और घर की मदद करने के लिए फैक्ट्री में काम करती थी। उसने बताया, “जब मशीन से अजीब आवाज आई तो मैं देखने गया। वहां पहुंचा तो देखा कि मेरी बेटी मशीन में फंसी है। उसे निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक वह जा चुकी थी।” स्थानीय लोगों और फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों ने इस हादसे को बेहद दुखद बताया और कहा कि फैक्ट्री में मशीनों पर काम करने वाले कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और
प्रशिक्षण
नहीं दिया जाता। उनका कहना है कि लकड़ी काटने वाली मशीनें बेहद खतरनाक होती हैं, जिन पर बिना उचित सावधानी के काम करना जानलेवा साबित हो सकता है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फैक्ट्री से मिले तकनीकी विवरण के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि सुरक्षा में लापरवाही पाई गई, तो फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इस हादसे ने पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी है। ग्रामीणों और पड़ोसियों ने मुन्ना खान के परिवार के प्रति संवेदना जताई और प्रशासन से पीड़ित परिवार की मदद की मांग की।
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