गर्भवती महिला से मारपीट मामलें में डॉ.किरण घनश्याम आहूजा के खिलाफ दर्ज नहीं हुई FIR
न्याय के लिए दर-दर भटक रही पीड़िता
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में डॉग रेस्क्यू संस्था को कथित रूप से पुलिस द्वारा खुली छूट मिलने के आरोपों के बीच एक गंभीर मामला सामने आया है। पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के भांटागांव चौक में 4 महीने की गर्भवती महिला गुरप्रीत कौर गिल के साथ कथित तौर पर डॉ.किरण घनश्याम आहूजा और उनके सहयोगियों ने मारपीट की। पीड़िता का आरोप है कि उनके साथ गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और मोबाइल व पालतू कुत्ता चोरी जैसी घटनाएँ हुईं, बावजूद इसके डॉ. आहूजा के खिलाफ FIR अब तक दर्ज नहीं की गई है। गुरप्रीत कौर गिल ने बताया कि घटना के दिन डॉ. आहूजा उनके दो पालतू पोमेलियन कुत्तों को रेस्क्यू करने के बहाने उनके घर पहुंची।
आरोप है कि डॉ. आहूजा ने उनके एक कुत्ते को जबरन मृत घोषित कर दिया और उचित इलाज नहीं करवाया। इसके चलते कुत्ता दम तोड़ गया। गुरप्रीत का कहना है कि डॉ. आहूजा ने संस्था के नाम का इस्तेमाल कर उन्हें डराया-धमकाया और उनके मोबाइल व कुत्ते की चोरी की। पीड़िता ने चार दिनों तक पुरानी बस्ती थाना में 5-5 घंटे लगातार न्याय की गुहार लगाई, लेकिन पुलिस ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। गुरप्रीत ने स्पष्ट किया कि पुलिस की यह निष्क्रियता स्पष्ट रूप से डॉग रेस्क्यू संस्था को अपराध करने की खुली छूट प्रदान करती है। उनका कहना है कि अगर ऐसा रवैया जारी रहा, तो राजधानी में किसी भी दिन बड़ा अपराध घटित होने की संभावना है। स्थानीय निवासी और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में पुलिस की निष्क्रियता कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
FIR लंबित होने से आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं हो पा रही है, जिससे पीड़ितों को न्याय प्राप्त करने में बाधा आ रही है। गुरप्रीत ने पुलिस से अपील की है कि उनके खोए हुए पालतू कुत्ते को वापस दिलाया जाए और उनके साथ हुई मारपीट व मोबाइल चोरी की शिकायत पर तुरंत FIR दर्ज की जाए। पीड़िता ने कहा कि उन्हें अपने साथ हुई हिंसा और नुकसान के लिए न्याय की आवश्यकता है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन मामला अब सार्वजनिक और मीडिया की निगाह में आ चुका है। इस घटना ने रायपुर की पुलिस और कानून व्यवस्था की क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉग रेस्क्यू जैसी संस्थाओं को किसी भी व्यक्ति पर हमला करने की खुली छूट नहीं दी जानी चाहिए। कानूनी रूप से किसी भी अपराध की घटना में FIR दर्ज करना और तुरंत कार्रवाई करना आवश्यक है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।
गुरप्रीत कौर गिल के साथ हुई इस मारपीट और पालतू कुत्ते की चोरी के मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजधानी रायपुर में नागरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता है। FIR दर्ज नहीं होने के कारण आरोपी डॉ. आहूजा अभी भी कानूनी रूप से मुक्त हैं, और इससे अन्य नागरिकों की सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखा दिया है कि कानून के तहत किसी भी संस्थान या व्यक्ति को अपराध करने की छूट नहीं दी जानी चाहिए। पुलिस और प्रशासन पर यह जिम्मेदारी है कि वे न्याय सुनिश्चित करें और अपराधियों को कानून के तहत काबू में लाएं। राजधानी रायपुर में गर्भवती महिला के साथ हुई हिंसा और पालतू कुत्ते की चोरी का मामला समाज में सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। पुलिस और प्रशासन को तुरंत FIR दर्ज करके जांच शुरू करनी चाहिए और पीड़िता को न्याय दिलाना चाहिए।