नशीली दवाओं का बड़ा खुलासा, पूजा मेडिकल स्टोर पर छापा

छग

Update: 2025-08-12 16:23 GMT
Rajim. राजिम। गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर में नशीली दवाओं के अवैध भंडारण और बिक्री के मामले में खाद्य एवं औषधि विभाग की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। विभाग के नियंत्रक के निर्देश पर विशेष टीम ने गुरुवार को फिंगेश्वर स्थित पूजा मेडिकल स्टोर पर औचक छापा मारा। इस छापे का नेतृत्व औषधि निरीक्षक धर्मवीर सिंह ध्रुव और सतीश सोनी ने किया। विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि पूजा मेडिकल स्टोर से नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई की जा रही है और यहां बिक्री नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने छापेमारी की योजना बनाई और बिना पूर्व सूचना के टीम मौके पर पहुंची।
निरीक्षण के दौरान स्टोर में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच में पता चला कि यहां बड़ी मात्रा में नशीली दवाओं का स्टॉक मौजूद था, जिसके लिए कोई वैध लाइसेंस या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके अलावा, स्टोर में रखी गई कई दवाओं की एक्सपायरी डेट खत्म हो चुकी थी, फिर भी उन्हें बिक्री के लिए रखा गया था, जो कि औषधि नियंत्रण अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है। औषधि निरीक्षकों ने पाया कि स्टोर में नशीली दवाओं की बिक्री के लिए अनिवार्य बिक्री रजिस्टर, परमिट और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। बिक्री रिकॉर्ड का रखरखाव भी ठीक से नहीं किया गया था, जिससे यह साफ हो गया कि बिक्री और भंडारण दोनों ही नियम विरुद्ध हो रहे थे।
विभाग की टीम ने मौके पर मौजूद स्टाफ से भी पूछताछ की, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। टीम ने पूरी कार्रवाई का पंचनामा तैयार किया और जब्त दवाओं की सूची बनाई। साथ ही, संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए समय दिया गया है। औषधि निरीक्षक धर्मवीर सिंह ध्रुव ने बताया कि यदि संचालक का जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो उच्च अधिकारियों के निर्देश पर मेडिकल स्टोर का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई जिले में अवैध नशीली दवाओं के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए की जाती है।
साथ ही, निरीक्षक सतीश सोनी ने बताया कि नशीली दवाओं की अवैध बिक्री न सिर्फ कानूनी अपराध है, बल्कि यह समाज के युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि विभाग भविष्य में भी इस तरह की आकस्मिक जांचें जारी रखेगा। इस कार्रवाई के बाद फिंगेश्वर और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का माहौल है। कई लोग मान रहे हैं कि यह कदम नशे के अवैध व्यापार पर रोक लगाने में मदद करेगा, लेकिन कुछ लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह कार्रवाई वास्तव में पूरी तरह निष्पक्ष होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के मामले पहले भी सामने आए हैं, लेकिन समय के साथ राजनीतिक दबाव या अन्य कारणों से उन्हें दबा दिया गया।
जानकार बताते हैं कि गरियाबंद जिले में नशीली दवाओं का अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा है। छोटे कस्बों और गांवों में भी नशे का जाल फैला हुआ है, जिसमें कई मेडिकल स्टोर और निजी सप्लायर शामिल होने की आशंका है। इस बार की कार्रवाई ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि नशे के इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रशासन और विभाग कितने गंभीर हैं। हालांकि, विभाग के अधिकारियों का दावा है कि उनकी टीम इस तरह की अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही है और कानून के तहत सख्त
कार्रवाई
की जाएगी। उन्होंने जनता से अपील की है कि अगर कहीं भी नशीली दवाओं की अवैध बिक्री या भंडारण की जानकारी हो, तो तुरंत विभाग या पुलिस को सूचना दें। इस छापेमारी से यह स्पष्ट हो गया है कि नशीली दवाओं का अवैध व्यापार सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कस्बों में भी यह समस्या गंभीर रूप ले रही है। प्रशासन और विभाग के सामने चुनौती यह है कि इस अवैध कारोबार में शामिल सभी लोगों तक पहुंच बनाकर ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि नशे के जाल को जड़ से खत्म किया जा सके।
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