Mungeli. मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के ग्राम नेवासपुर में 17 वर्षीय नाबालिग बालिका की हत्या के मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। आरोपियों की न्यायिक रिमांड अस्वीकार करने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली पुलिस की पुनरीक्षण याचिका अपर सत्र न्यायालय ने स्वीकार कर ली है। निचली अदालत के पूर्व आदेश को पलटते हुए आरोपियों को 30 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे सीजेएम न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। इस आदेश के बाद मामले में गिरफ्तारी, रिमांड और आगे की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
CJM कोर्ट ने पहले खारिज की थी रिमांड की मांग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नेवासपुर हत्याकांड में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक रिमांड के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में पेश किया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पुलिस की रिमांड संबंधी मांग स्वीकार नहीं की थी। इसके साथ ही आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के स्वयं के मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया था। इस निर्णय के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी प्रक्रिया और पुलिस द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को लेकर कानूनी सवाल खड़े हुए थे। पुलिस ने सीजेएम न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए अपर सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी।
अपर सत्र न्यायालय में पुलिस की याचिका स्वीकार
मामले में पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने पुलिस की ओर से पक्ष प्रस्तुत किया। सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायालय ने पुलिस की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली और सीजेएम न्यायालय के पूर्व आदेश को पलट दिया। इसके साथ ही संबंधित आरोपियों को 30 अक्टूबर को सुबह 11 बजे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, पुनरीक्षण याचिका स्वीकार होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपियों को तत्काल न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। आगे की स्थिति सीजेएम न्यायालय में होने वाली कार्यवाही और उसके आदेश पर निर्भर करेगी।
गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर उठे थे सवाल
इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और रिमांड से संबंधित कानूनी प्रक्रिया भी चर्चा का विषय बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3), 47 और 48 के अनुपालन को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं। इन प्रावधानों में गिरफ्तारी से संबंधित प्रक्रिया, गिरफ्तार व्यक्ति को आवश्यक जानकारी देने और संबंधित कानूनी औपचारिकताओं के पालन जैसे विषय शामिल हैं। बताया गया कि सीजेएम न्यायालय में सुनवाई के दौरान गिरफ्तारी और विवेचना से जुड़े दस्तावेजों में कथित कमियों पर भी विचार किया गया था। हालांकि, इन आपत्तियों और न्यायालय के निष्कर्षों की पूरी जानकारी लिखित आदेश के परीक्षण से ही स्पष्ट होगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का दिया गया हवाला
पुलिस की पुनरीक्षण याचिका से संबंधित सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 2026 के दो निर्णयों का हवाला दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें स्टेट ऑफ मेघालय बनाम सोनम रघुवंशी और मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया है। इन निर्णयों के किस कानूनी सिद्धांत को नेवासपुर हत्याकांड में लागू किया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी अपर सत्र न्यायालय के विस्तृत लिखित आदेश से सामने आएगी।
अब 30 अक्टूबर की सुनवाई पर निगाहें
अपर सत्र न्यायालय के निर्देश के बाद आरोपियों को शुक्रवार, 30 अक्टूबर को सुबह 11 बजे सीजेएम न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना है। इस दौरान आगे की कानूनी प्रक्रिया और रिमांड संबंधी प्रश्नों पर न्यायालय के निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। पुलिस की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार होने के बाद मामले ने नया मोड़ लिया है, लेकिन आरोपियों की हिरासत के संबंध में अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। अब सीजेएम न्यायालय की आगामी कार्यवाही से यह तय होगा कि प्रकरण में आगे कौन-सी न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।