Bilaspur. बिलासपुर। बिलासपुर में नकली सोने के जरिए ज्वेलर्स और गोल्ड फाइनेंस कंपनियों को लाखों रुपए की चपत लगाने वाले एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने का मामला सामने आया है। तारबाहर और खुदीराम बोस चौक क्षेत्र में सामने आए इन मामलों ने सराफा कारोबारियों में चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार यह गिरोह खुद को गरीब और जरूरतमंद बताकर ज्वेलर्स और फाइनेंस कंपनियों के पास पहुंचता है और पैतृक सोना गिरवी रखने की बात करता है। दावा किया जाता है कि उनके पास सोने के कोई दस्तावेज नहीं हैं, लेकिन असली जैसा दिखने वाला सोना वे गिरवी रखते हैं। शुरुआती जांच में यह सोना असली प्रतीत होता है, जिससे कारोबारी आसानी से धोखे में आ जाते हैं।
बताया जा रहा है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले लोगों से जुड़ा हो सकता है। ये लोग बिलासपुर में आकर सोना गिरवी रखकर बड़ी रकम हासिल कर लेते हैं और बाद में गायब हो जाते हैं। जानकारी के अनुसार, हाल ही में तारबाहर क्षेत्र में एक मामले में कुछ लोगों ने एक ज्वेलर से संपर्क कर कहा कि उन्हें आर्थिक जरूरत है और उनके पास केवल पैतृक सोना है। त्योहारी सीजन के दौरान जांच में कमी और कर्मचारियों की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर करीब 10 लाख रुपए का लेनदेन कर लिया गया।
कुछ दिनों बाद जब सोने की दोबारा जांच की गई, तो वह नकली पाया गया। इसके बाद जब आरोपियों से संपर्क किया गया तो उन्होंने पहले अनभिज्ञता जताई, लेकिन बाद में मामला पुलिस तक पहुंचने की आशंका के बाद आंशिक रकम लौटाने की बात कही गई। सूत्रों का दावा है कि इस तरह की घटनाएं केवल एक बार नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से कई जगहों पर की गई हैं। आरोप है कि गिरोह के लोग नकली सोने को गिरवी रखकर अलग-अलग ज्वेलर्स और वित्तीय संस्थानों से रकम लेते हैं और फिर फरार हो जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की बढ़ती कीमतों के बीच यह एक नया तरह का आर्थिक अपराध बनकर उभर रहा है। वर्तमान में सोना 24 कैरेट के हिसाब से अत्यधिक ऊंचे स्तर पर बिक रहा है, जिससे इस तरह की धोखाधड़ी और बढ़ने की आशंका है। सूत्रों के अनुसार कई गोल्ड फाइनेंस कंपनियां भी इस गिरोह के निशाने पर हैं। आरोप है कि लक्ष्य पूरा करने के दबाव में कुछ कर्मचारियों द्वारा बिना पूरी जांच के ही लोन स्वीकृत किए जा रहे हैं, जिससे जोखिम और बढ़ गया है।
स्थानीय सराफा कारोबारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में नकली सोने की पहचान सामान्य जांच में मुश्किल हो जाती है और असलियत तब सामने आती है जब सोने को पिघलाया या प्रोसेस किया जाता है। कई मामलों में ठगी का पता महीनों बाद चलता है। इसके अलावा आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क केवल सोने तक सीमित नहीं है, बल्कि नकली हीरे-जवाहरात के जरिए भी ठगी की जा सकती है। यदि यह सही साबित होता है, तो यह एक बड़ा अंतरराज्यीय आर्थिक अपराध नेटवर्क हो सकता है।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि गिरोह के तार उत्तर प्रदेश, बिहार और संभवतः अन्य देशों तक जुड़े हो सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल Tara Bahar Area और आसपास के सराफा बाजार में दहशत का माहौल है। व्यापारी अब हर लेनदेन में अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं और गोल्ड फाइनेंस कंपनियां भी अपने सत्यापन सिस्टम को मजबूत करने की बात कह रही हैं। पुलिस से मांग की जा रही है कि इस पूरे नेटवर्क की गंभीर जांच की जाए और सक्रिय गिरोह को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए, ताकि बड़े आर्थिक नुकसान को रोका जा सके।
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