Raipur. रायपुर। कांग्रेस महासचिव और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब की जगह असम का प्रभारी बनाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस के इस संगठनात्मक बदलाव को लेकर भूपेश बघेल पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। सीएम साय ने भूपेश बघेल के पंजाब प्रभारी रहने के दौरान सामने आए विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय पंजाब में उनके खिलाफ ‘गो बैक’ के पोस्टर लगाए गए थे। अब उन्हें पंजाब से हटाकर असम की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे वे खुद अच्छी तरह समझ सकते हैं।
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भूपेश बघेल पहले पंजाब के प्रभारी थे और वहां उनके विरोध में ‘गो बैक’ के पोस्टर चिपकाए गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उन्हें पंजाब से असम जाना पड़ा है, इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को वे अच्छी तरह समझ सकते हैं। सीएम साय का यह बयान सामने आने के बाद प्रदेश की सियासत में इसे कांग्रेस के संगठनात्मक फैसले पर भाजपा की ओर से किए गए सीधे हमले के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, कांग्रेस की ओर से भूपेश बघेल को पंजाब की जगह असम का प्रभारी बनाए जाने के बाद उनके संगठनात्मक दायित्व में बदलाव हुआ है। इसी बदलाव को लेकर मुख्यमंत्री साय से सवाल किया गया था। जवाब में उन्होंने भूपेश बघेल के पंजाब प्रभारी रहते हुए वहां हुए विरोध का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री की टिप्पणी ने इस संगठनात्मक बदलाव को लेकर राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है।


भूपेश बघेल और विष्णुदेव साय के बीच राजनीतिक बयानबाजी छत्तीसगढ़ की राजनीति में पहले भी देखने को मिलती रही है। दोनों नेता अलग-अलग राजनीतिक मंचों से एक-दूसरे की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस संगठन में भूपेश बघेल के नए प्रभार को लेकर सीएम साय की टिप्पणी को राज्य की सियासत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आमतौर पर राजनीतिक मुद्दों पर सधी हुई और संतुलित प्रतिक्रिया देने के लिए जाने जाते हैं। हालांकि विपक्ष की ओर से भाजपा सरकार या संगठन पर किए जाने वाले हमलों का वे कई मौकों पर खुलकर जवाब देते रहे हैं। व्यक्तिगत स्तर पर तीखी टिप्पणियों से अक्सर दूरी रखने वाले सीएम साय ने इस बार भूपेश बघेल के प्रभार परिवर्तन पर अपेक्षाकृत कड़ा राजनीतिक बयान दिया है।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस बढ़ने की संभावना है। भाजपा इसे कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक परिस्थितियों से जोड़कर देख सकती है, जबकि कांग्रेस की ओर से इसे भाजपा का राजनीतिक हमला बताया जा सकता है। हालांकि भूपेश बघेल की ओर से मुख्यमंत्री साय के इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है।
असम की जिम्मेदारी मिलने के बाद भूपेश बघेल के सामने अब वहां कांग्रेस संगठन से जुड़े दायित्वों को संभालने की चुनौती होगी। वहीं छत्तीसगढ़ में उनके प्रभार परिवर्तन को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री साय की टिप्पणी ने इस घटनाक्रम को प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना दिया है। फिलहाल मुख्यमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के आसार हैं। भूपेश बघेल को असम का प्रभारी बनाए जाने का संगठनात्मक फैसला कांग्रेस के स्तर पर लिया गया है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसे लेकर भाजपा की प्रतिक्रिया ने राज्य की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है।
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