Ambikapur. अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में जमीन से जुड़े एक चर्चित मामले में आरोपी को मिली जमानत के बाद प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अजीत वसंत ने आरोपी आजाद इराकी की जमानत के मामले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखकर जमानत आवेदन के निराकरण की प्रक्रिया और न्यायालयीन क्षेत्राधिकार से जुड़े बिंदु उठाए हैं। सरगुजा जिला प्रशासन की ओर से जमानत आदेश के खिलाफ सक्षम न्यायालय में अपील की प्रक्रिया भी शुरू करने की बात सामने आई है।
यह मामला अंबिकापुर के प्रतीक्षा बस स्टैंड के पास स्थित रिंग बांध तालाब क्षेत्र की जमीन से जुड़ा है। प्रशासन के अनुसार, खसरा नंबर 3714 की जमीन के दस्तावेजों में कथित कूटरचना और आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासी के नाम पर स्थानांतरित किए जाने से जुड़े आरोपों की जांच चल रही है। इसी मामले में आजाद इराकी समेत अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया था।
जमानत प्रक्रिया को लेकर क्या सवाल उठे?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी आजाद इराकी ने 25 सितंबर 2026 को जमानत आवेदन प्रस्तुत किया था और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने उसी दिन उसे जमानत दे दी। जिला प्रशासन के मुताबिक, अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत सुनवाई में पर्याप्त अवसर मिलने को लेकर सवाल हैं। उप संचालक अभियोजन की रिपोर्ट में जमानत आदेश में कुछ त्रुटियों का उल्लेख किए जाने की बात भी सामने आई है।
कलेक्टर के पत्र में भारतीय न्याय संहिता की कुछ धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की संभावित धाराओं का भी उल्लेख किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन का कहना है कि मामले की गंभीरता और अनुसूचित जनजाति वर्ग से जुड़े भूमि विवाद को देखते हुए जमानत आदेश के खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे कार्रवाई की जानी चाहिए।
जिला जज को पत्र लिखने पर चर्चा
इस घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कलेक्टर ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र भेजकर जमानत प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया है। कुछ रिपोर्टों में एक सेवानिवृत्त मुख्य सचिव के हवाले से कहा गया है कि न्यायिक आदेश को चुनौती देने के लिए निर्धारित अपील या पुनरीक्षण की कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हालांकि, इस टिप्पणी को संबंधित व्यक्ति का मत मानकर ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जिला प्रशासन ने अब जमानत आदेश को सक्षम न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी की है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन इस मामले को आगे न्यायिक स्तर पर उठाने की दिशा में बढ़ रहा है।
अजीत वसंत कोरबा में भी रहे चर्चा में
अजीत वसंत वर्तमान में सरगुजा के कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी हैं। सरकारी वेबसाइट पर भी उनकी नियुक्ति की पुष्टि होती है। उनके प्रशासनिक कार्यों से जुड़ी हालिया गतिविधियों में विकास कार्यों की समीक्षा और विभिन्न विभागों को समयबद्धता व गुणवत्ता के निर्देश देना शामिल है। वहीं, उनके कोरबा कलेक्टर रहते पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर के साथ विवाद होने और बाद में उनके स्थानांतरण से जुड़े दावे भी चर्चा में हैं। इन दावों को लेकर उपलब्ध स्रोतों में पर्याप्त स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है, इसलिए इन्हें पुष्ट तथ्य के रूप में नहीं रखा जा सकता। फिलहाल अंबिकापुर के जमीन मामले में आगे की कार्रवाई और जमानत आदेश के खिलाफ प्रशासन की कानूनी पहल पर नजर है। मामले में आरोपों और प्रशासन के दावों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगा।
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