महासमुंद में 1.5 करोड़ के एलपीजी गैस गबन मामले की जांच तेज, मददगारों से पूछताछ

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Update: 2026-06-25 18:10 GMT
Mahasamund. महासमुंद। जिले में करीब 1.5 करोड़ रुपये के एलपीजी गैस गबन मामले की जांच महासमुंद पुलिस द्वारा तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। मामले में अब उन लोगों तक भी जांच का दायरा पहुंच गया है, जिन्होंने फरार आरोपियों को कथित रूप से शरण और सहायता प्रदान की थी। इसी क्रम में मुंबई के चार लोगों को पूछताछ के लिए तलब किया गया, जो गुरुवार को जांच टीम के समक्ष उपस्थित हुए। पुलिस के अनुसार ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और डायरेक्टर सार्थक सिंह ठाकुर इस मामले में मुख्य आरोपी हैं और फरार चल रहे हैं। उनकी फरारी के दौरान मदद करने के आरोप में जोगेंद्र सिंह, राजू माइकल, राकेश साह और प्रशांत पाटिल को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया। जांच में यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपियों को किस प्रकार की आर्थिक, तकनीकी और अन्य सहायता दी गई थी।
पुलिस जांच में अब तक सामने आया है कि जब्त किए गए 6 गैस कैप्सूलों से लगभग 92 मीट्रिक टन एलपीजी गैस निकालकर उसे करीब 90 लाख रुपये में अवैध रूप से बेच दिया गया था। इसके बाद पूरे मामले को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी पंचनामा और दस्तावेज तैयार किए गए। जांच अधिकारियों के अनुसार इस पूरे प्रकरण में कई स्तरों पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। दस्तावेजों और वजन रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं, जिससे फर्जीवाड़े और कूट रचना की आशंका और मजबूत हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल सभी लोगों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कथित रूप से तत्कालीन खाद्य अधिकारी अजय यादव और भाजपा नेता पंकज चंद्राकर ने गैस की मात्रा का आकलन करने के बाद उसे बाजार में खपाने की साजिश रची थी। इसके लिए रायपुर निवासी मनीष चौधरी के माध्यम से ठाकुर पेट्रोकेमिकल से संपर्क स्थापित किया गया और लगभग 90 लाख रुपये में सौदा तय किया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के बीच कई बार गोपनीय बैठकें हुई थीं और एक समान बयान देने की रणनीति बनाने की भी जानकारी मिली है। इससे जांच एजेंसियों को संदेह है कि पूरे मामले में सुनियोजित साजिश के तहत आर्थिक लाभ उठाया गया। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है और संबंधित दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और कॉल डिटेल्स को भी खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है और और भी नाम सामने आ सकते हैं। महासमुंद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी आरोपी या मददगार को बख्शा नहीं जाएगा और सभी के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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