औद्योगिक हादसा: जांच रिपोर्ट के बाद रियल इस्पात प्रबंधन को नोटिस

छग

Update: 2026-02-01 14:22 GMT
Baloda Bazar. बलौदाबाजार। जिले के ग्राम बकुलाही स्थित मैसर्स रियल इस्पात एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड में 22 जनवरी को हुई भीषण औद्योगिक दुर्घटना के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देश पर कारखाना प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने प्रबंधन को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस का संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने की स्थिति में विधिसम्मत कठोर कार्रवाई किए जाने की चेतावनी भी दी गई है। सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा द्वारा जारी आदेश के अनुसार संयुक्त जांच में कारखाना अधिनियम 1948 एवं छत्तीसगढ़ कारखाना नियमावली 1962 के कई गंभीर उल्लंघन सामने आए हैं। जांच समिति ने दुर्घटना के लिए कारखाना प्रबंधन की लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को प्रमुख कारण माना है।

जांच में सामने आई गंभीर लापरवाहियां
जांच रिपोर्ट के अनुसार किल्न क्रमांक-1 का संचालन बिना शटडाउन किए किया जा रहा था और उसी दौरान श्रमिकों से कार्य लिया गया। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कार्यस्थल पर आवश्यक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई), मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और सुरक्षित कार्य प्रणाली उपलब्ध नहीं थी। इससे श्रमिकों की जान जोखिम में पड़ी और दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ गई।

अन्य कानूनों के उल्लंघन का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया है कि कारखाना प्रबंधन द्वारा जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से वाणिज्य उत्पादन की आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। इसके अलावा न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948, संविदा श्रमिक (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम 1970 और अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम 1979 के तहत जरूरी पंजीकरण और अनुज्ञप्ति भी नहीं ली गई थी। इन तथ्यों ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुआवजा भुगतान की स्थिति
प्रशासन के मुताबिक दुर्घटना में मृत पांच श्रमिकों के परिजनों को कारखाना प्रबंधन द्वारा प्रति मृतक 20 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। वहीं घायल श्रमिकों को प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया है। घायल श्रमिकों का इलाज बिलासपुर में जारी है और प्रशासन द्वारा उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

कार्य अनुमति और प्रशिक्षण में भी खामी
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि डस्ट सेटलिंग चेंबर में जमे गर्म ऐश को वेट स्क्रैपर में गिराने के दौरान विधिवत कार्य अनुमति (वर्क परमिट) जारी नहीं की गई थी। साथ ही कुछ श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण दिए बिना ही जोखिमपूर्ण कार्य में लगाया गया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

दुर्घटना का पूरा विवरण
प्रशासन के अनुसार 22 जनवरी को सुबह करीब 9.40 बजे किल्न क्रमांक-1 के डस्ट सेटलिंग चेंबर के द्वितीय तल पर कार्य के दौरान अचानक विस्फोट हुआ। इस हादसे में छह श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद प्राथमिक जांच के आधार पर कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 40(2) के तहत किल्न क्रमांक-1 के संचालन और उससे जुड़े मेंटेनेंस कार्यों पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि श्रमिकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नोटिस के जवाब का परीक्षण करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
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