Balrampur. बलरामपुर। जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एमआर यादव पर लगे करीब 4 करोड़ 51 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता और घोटाले के आरोपों के मामले में प्रशासनिक जांच अब अगले चरण में पहुंच गई है। मामले की जांच के लिए गठित टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। रिपोर्ट मिलने के बाद कलेक्टर ने प्रभारी DEO एमआर यादव को नोटिस जारी कर पूरे मामले में उनका पक्ष और जवाब मांगा है। अब DEO के जवाब के बाद जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है।
बताया गया है कि प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यकाल के दौरान जिला कोषालय से विभिन्न कार्यों और सामग्रियों की खरीदी के नाम पर 4 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आहरित की गई। इस राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोपों के अनुसार, शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए स्वच्छता सामग्री, खेल सामग्री, फर्नीचर सहित अन्य सामानों की खरीदी और भुगतान किए गए। इन्हीं वित्तीय लेन-देन और भुगतान प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायतें सामने आई थीं।
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने इसकी गंभीरता को देखते हुए जांच टीम का गठन किया। टीम ने शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए। जांच के दौरान विभागीय स्तर पर किए गए भुगतान, राशि आहरण और खरीदी से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की गई। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से मामले में जानकारी ली गई, जबकि प्रभारी DEO को भी जांच से जुड़े आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए तलब किया गया था।
जांच टीम ने उपलब्ध दस्तावेजों और अधिकारियों-कर्मचारियों के दर्ज बयानों के आधार पर अपनी प्रारंभिक जांच पूरी की। इसके बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी। हालांकि, प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आए सभी बिंदुओं और निष्कर्षों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन रिपोर्ट के बाद प्रभारी DEO को नोटिस जारी होना मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
कलेक्टर की ओर से जारी नोटिस में प्रभारी DEO एमआर यादव से मामले में अपना पक्ष रखते हुए जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। प्रशासन अब उनके जवाब का इंतजार कर रहा है। माना जा रहा है कि DEO के जवाब और जांच टीम की रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों का परीक्षण करने के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा। इस कार्रवाई में यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
मामले को लेकर प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि भ्रष्ट अधिकारियों को जिले में रहने नहीं दिया जाएगा। उनके इस बयान के बाद शिक्षा विभाग के भीतर भी मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल प्रशासनिक जांच के प्रारंभिक चरण में है और प्रभारी DEO से जवाब मांगा गया है। इसलिए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच की पूरी प्रक्रिया और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आने के बाद ही होगी। प्रशासन के सामने अब जांच रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों, विभागीय दस्तावेजों और प्रभारी DEO के जवाब के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचने की जिम्मेदारी है।
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