Balod. बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरुर विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़भूम परिसर में पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। स्कूल परिसर में बिना किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के 29 हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई किए जाने की पुष्टि हुई है। इस घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है और कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने तत्काल जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के निर्देश के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) गुरुर ने 2 जुलाई को विद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि परिसर में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई नियमों को दरकिनार कर की गई है। जांच रिपोर्ट में अवैध कटाई की पुष्टि होने के बाद बीईओ ने 3 जुलाई को गुरुर थाना प्रभारी को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करने का आवेदन दिया है।
इसके साथ ही मामले में मुख्य आरोपी प्रधान पाठक के निलंबन की अनुशंसा भी उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। प्रशासन ने इसे गंभीर पर्यावरणीय और शासकीय संपत्ति से जुड़ा उल्लंघन माना है। जांच में यह भी सामने आया है कि पेड़ों की कटाई कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं था, बल्कि इसके लिए पहले से योजना बनाई गई थी। जानकारी के अनुसार, 23 अप्रैल को शाला विकास समिति की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें नियमों को दरकिनार करते हुए पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव पारित किया गया। इस कथित निर्णय में शाला विकास समिति के अध्यक्ष जीवन लाल उईके और सदस्य निर्मला उईके की भूमिका भी सामने आई है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया में माध्यमिक स्तर के प्रधान पाठक और शाला विकास समिति के सचिव डोमर सिंह निषाद की मुख्य भूमिका रही, जिनकी देखरेख में यह कार्य किया गया। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि पेड़ों की कटाई से पहले किसी भी प्रकार की वैधानिक अनुमति नहीं ली गई थी। न तो वन विभाग से और न ही राजस्व विभाग से कोई अनुमति प्राप्त की गई, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है। बीईओ ललित चंद्राकर ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह पाया गया है कि यह कार्य पदीय अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए और नियमों की अनदेखी कर किया गया है। उन्होंने बताया कि थाना प्रभारी को नामजद एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र भेज दिया गया है और संबंधित प्रधान पाठक सहित अन्य संलिप्त कर्मचारियों के निलंबन की अनुशंसा भी की गई है।
स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि स्कूल परिसर में पेड़ों की कटाई बेहद गंभीर मामला है, क्योंकि यह न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हानिकारक है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की विस्तृत जांच की जाएगी और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका स्पष्ट की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं इस पूरे प्रकरण में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल तो नहीं थे। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अवैध कटाई से स्थानीय पारिस्थितिकी पर सीधा असर पड़ता है। 29 पेड़ों की कटाई का मतलब है लंबे समय से विकसित हरियाली का नुकसान, जिसे दोबारा स्थापित करने में कई वर्ष लग सकते हैं। फिलहाल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।