Bilaspur. बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्य की जेलों में बढ़ती भीड़ और कल्याण अधिकारियों की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने सोमवार को राज्य सरकार और जेल महानिदेशक को निर्देश दिए कि वे इस स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाएँ। हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा कि राज्य की 33 जेलों में वर्तमान में क्षमता से लगभग 40 प्रतिशत अधिक कैदी बंद हैं। डीजी, जेल एवं सुधार सेवाओं के शपथ पत्र के अनुसार, 9 सितंबर 2025 तक 14,883 कैदियों की क्षमता वाले जेलों में कुल 21,335 कैदी हैं। इस भीड़भाड़ के कारण न केवल कैदियों के लिए जीवन कठिन हो रहा है, बल्कि जेल प्रशासन के लिए सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियां भी उत्पन्न हो रही हैं।
राज्य सरकार ने जवाब में कहा कि प्रोबेशन और वेलफेयर ऑफिसर की भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पहले ये दो अलग-अलग पद थे, जिन्हें अब एक सिंगल पोस्ट में मिलाकर प्रोबेशन और वेलफेयर ऑफिसर के नाम से बनाया गया है। भर्ती के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के माध्यम से परीक्षा आयोजित की जाएगी। सरकार ने यह भी बताया कि राज्य में 20 जिला जेलों के लिए 20 नए पद बनाए जाने का प्रस्ताव वित्तीय वर्ष 2026-2027 के मुख्य बजट में शामिल किया जाएगा। हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हर जिला जेल में वेलफेयर ऑफिसर की नियुक्ति आवश्यक है और कैदियों के लिए अतिरिक्त बैरक समय पर बनाए जाएँ, ताकि भीड़भाड़ की समस्या कम हो और कैदियों को मानक सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि नई जेल भवन निर्माण के समय मॉडल प्रिज़न मैनुअल 2016 का पालन अनिवार्य किया जाए, ताकि कैदियों के अधिकार सुरक्षित रहें।
जेलों में भीड़भाड़ के कारण सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, राज्य की विभिन्न केंद्रीय और जिला जेलों की कुल क्षमता लगभग 15,000 है, जबकि इनमें 20,500 से अधिक कैदी बंद हैं। हाई कोर्ट ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि प्रशासन को अतिरिक्त बैरक निर्माण, वेलफेयर ऑफिसर की नियुक्ति और कैदियों की सुविधाओं को सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि नए जेल भवनों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। हाल ही में बेमेतरा जिले में नई जेल का निर्माण पूरा किया गया है। इसके अलावा, अतिरिक्त पदों के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और भर्ती प्रक्रिया के जरिए नई नियुक्तियों का कार्य मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
हाई कोर्ट ने डीजी, जेल एवं सुधार सेवाओं को विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं, जिसमें जेलों की वर्तमान स्थिति, कैदियों की संख्या, भीड़भाड़, अधिकारियों की उपलब्धता और सुधारात्मक उपायों की जानकारी शामिल हो। कोर्ट ने मार्च 2026 में अगली सुनवाई तय की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कैदियों के अधिकारों की सुरक्षा, सुरक्षा मानक, स्वास्थ्य सुविधाएँ और जेल प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए। हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को कानून और मानवाधिकारों के अनुरूप जेलों का प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा।
छत्तीसगढ़ में जेलों में भीड़भाड़ और कल्याण अधिकारियों की कमी लंबे समय से समस्या रही है। हाई कोर्ट ने इसे गंभीर रूप से लेते हुए प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि कैदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाएँ जाएँ। राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे नए प्रयास, अतिरिक्त पदों की भर्ती और नए जेल भवनों का निर्माण इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। बिलासपुर हाई कोर्ट का यह आदेश जेल प्रशासन और राज्य सरकार के लिए चेतावनी के रूप में है कि कैदियों के अधिकारों और सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जेलों में भीड़भाड़ और अधिकारी कमी के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई अनिवार्य है।