GST विभाग ने मास्टरमाइंड को किया गिरफ्तार, 9.54 करोड़ के ITC फ्रॉड का खुलासा

छग

Update: 2026-07-22 13:14 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वस्तु एवं सेवा कर (GST) विभाग ने फर्जी बिलिंग और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के टैक्स फ्रॉड का पर्दाफाश किया है। विभाग ने 53 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग के जरिए 9.54 करोड़ रुपये के बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले के मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड विजय कुमार यादव को 20 जुलाई को गिरफ्तार किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद 3 अगस्त तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। इस कार्रवाई को प्रदेश में GST चोरी और फर्जी बिलिंग के खिलाफ अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
GST विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया कि विजय कुमार यादव ने फर्जी बिलिंग के उद्देश्य से मेसर्स माया स्टील एंड एंटरप्राइज तथा मेसर्स मायरा स्टील एंटरप्राइजेज नाम से दो फर्मों का संचालन किया। इन दोनों फर्मों के माध्यम से बिना किसी वास्तविक व्यापारिक गतिविधि के लगभग 53 करोड़ रुपये के फर्जी टैक्स इनवॉइस जारी किए गए। इन फर्जी बिलों के आधार पर 9.54 करोड़ रुपये का बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट विभिन्न फर्मों को हस्तांतरित किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने केवल अन्य फर्मों को ही फर्जी ITC का लाभ नहीं पहुंचाया, बल्कि स्वयं भी बंद और फर्जी फर्मों से प्राप्त इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर उसे अपनी कर देनदारियों के भुगतान में इस्तेमाल किया। इस पूरी प्रक्रिया में वास्तविक माल की खरीद-बिक्री नहीं हुई, बल्कि केवल कागजी लेन-देन दिखाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।
GST अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से कई फर्जी और निष्क्रिय फर्मों का नेटवर्क तैयार किया था। इन फर्मों के माध्यम से केवल बिल जारी किए जाते थे, जबकि वस्तुओं की वास्तविक आपूर्ति नहीं होती थी। इस तरह की गतिविधियां GST व्यवस्था की पारदर्शिता को प्रभावित करती हैं और सरकार के राजस्व को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती हैं। विस्तृत जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। विभाग के अनुसार, आरोपी ने 10 ऐसी फर्मों से फॉर्म ITC-02 के माध्यम से लगभग 6.13 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया, जिनका GST पंजीयन पहले ही निरस्त किया जा चुका था या जो आपस में संबंधित पक्ष थीं। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि इन फर्मों के बीच वास्तविक रूप से न तो विलय (Merger), न डी-मर्जर और न ही अमलगमेशन जैसी कोई प्रक्रिया हुई थी, फिर भी नियमों का उल्लंघन कर ITC ट्रांसफर किया गया।
इसके अलावा जांच में यह भी पता चला कि पंजाब सहित अन्य राज्यों की नौ ऐसी फर्मों से लगभग 1.99 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया, जिनका GST पंजीयन रद्द हो चुका था या जो अस्तित्वहीन थीं। विभाग के अनुसार इन फर्मों से किसी भी प्रकार की वास्तविक माल आपूर्ति नहीं हुई थी, लेकिन दस्तावेजों में खरीद-बिक्री दर्शाकर फर्जी ITC का दावा किया गया। जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि बिना किसी वास्तविक खरीद के GSTR-2B और GSTR-3B रिटर्न के बीच अंतर का फायदा उठाकर 1.41 करोड़ रुपये का अतिरिक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट दावा किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का हिस्सा थी, जिसके माध्यम से टैक्स देनदारी को अवैध तरीके से कम किया गया।
GST विभाग ने बताया कि फर्जी बिलिंग और बोगस ITC के खिलाफ राज्यभर में विशेष अभियान लगातार जारी है। आधुनिक डेटा एनालिटिक्स, ई-वे बिल, GST रिटर्न और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान कर संदिग्ध लेन-देन की पहचान की जा रही है। जिन कारोबारियों द्वारा बिना वास्तविक व्यापार के केवल कागजी बिलों के आधार पर टैक्स लाभ लेने का प्रयास किया जा रहा है, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और फर्जी बिलिंग नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, फर्मों और लाभार्थियों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी GST अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। राज्य GST विभाग ने व्यापारियों से अपील की है कि वे केवल वास्तविक व्यापारिक लेन-देन के आधार पर ही टैक्स क्रेडिट का दावा करें और किसी भी प्रकार की फर्जी बिलिंग या बोगस ITC से दूर रहें। विभाग ने चेतावनी दी है कि कर चोरी, फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट के दुरुपयोग के मामलों में भविष्य में भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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