रेलवे स्टेशन में गांजा तस्करी, आरोपी को 10 साल की सजा और 1 लाख का जुर्माना
छग
Raipur. रायपुर। रायपुर रेलवे स्टेशन से जुड़े एक बड़े गांजा तस्करी मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी बेनरदा बीरा को 10 साल के कठोर कारावास और 1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस कोर्ट) किरण थवाईत ने शनिवार को सुनाया। न्यायालय ने माना कि आरोपी के खिलाफ अपराध प्रमाणित हुआ है और उसने 20.490 किलोग्राम गांजा अवैध रूप से अपने कब्जे में रखा था। यह मामला 10 जुलाई 2024 की रात का है, जब रायपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 1, दुर्ग छोर खंभा नंबर-39 पर जीआरपी पुलिस ने एक त्वरित अभियान चलाया था।
अभियान के दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि एक संदिग्ध व्यक्ति दो पिट्ठू बैग लेकर बैठा है, जिनमें अवैध मादक पदार्थ होने की आशंका है। इस सूचना पर सहायक उपनिरीक्षक एस.के. राठौर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरक्षक एन.के. महाणा को दो स्वतंत्र गवाहों प्रहलाद पटेल और प्रकाश दुबे को तलब करने का निर्देश दिया। दोनों गवाहों को सूचना से अवगत कराकर उनसे लिखित सहमति ली गई। तत्पश्चात् पुलिस दल, गवाहों और विवेचना किट के साथ मौके पर पहुंचा। घटना स्थल पर बैठे व्यक्ति से पूछताछ करने पर उसने अपना नाम बेनरदा बीरा बताया। इसके बाद पुलिस ने उसे अधिनियम की धारा 50 के तहत उसके अधिकारों की जानकारी दी कि वह अपनी तलाशी मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में करा सकता है। आरोपी ने सहमति देने के बाद पुलिस को अपनी तलाशी लेने की अनुमति दी।
तलाशी के दौरान आरोपी के पास रखे दो पिट्ठू बैगों से 10 पैकेट गांजा बरामद हुए। ये पैकेट भूरे रंग के सेलोटेप से लपेटे गए थे, जिनमें बीज, फूल, पत्तियां और तना सहित नमीयुक्त वनस्पति पदार्थ पाया गया। इसकी गंध से स्पष्ट था कि यह गांजा है। मौके पर उपस्थित गवाहों के सामने बरामदगी का पंचनामा तैयार किया गया। बरामद गांजा की तौल इलेक्ट्रॉनिक तराजू से की गई, जिसकी कुल मात्रा 20.490 किलोग्राम पाई गई। पुलिस ने गांजा के साथ आरोपी के पास से इलेक्ट्रॉनिक तराजू और अन्य सामग्री भी जब्त की। सभी बरामद मादक पदार्थों को सील बंद कर वरिष्ठ अधिकारी को भेजा गया।
जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ धारा 20 (b) (ii) (C) एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया गया। अदालत में अभियोजन पक्ष ने सभी साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसमें पुलिस अधिकारियों, पंच गवाहों और लैब रिपोर्ट का बयान शामिल था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य, गवाहों के बयान और जब्ती की प्रक्रिया से यह सिद्ध होता है कि आरोपी बेनरदा बीरा ने कानून का उल्लंघन करते हुए बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ अपने कब्जे में रखा था। अदालत ने कहा कि इस प्रकार का अपराध समाज के लिए घातक है और युवा पीढ़ी को नशे की लत की ओर धकेलता है।
इसलिए अदालत ने आरोपी को 10 वर्ष का कठोर कारावास और 1 लाख रुपये का अर्थदंड देने का आदेश पारित किया। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। विशेष न्यायाधीश किरण थवाईत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि NDPS एक्ट के तहत ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि समाज में नशा कारोबार करने वालों को कड़ा संदेश मिल सके। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की बढ़ती तस्करी युवा वर्ग के भविष्य को बर्बाद कर रही है, इसलिए न्यायालय ऐसी गतिविधियों पर शून्य सहिष्णुता का रुख अपनाएगा। जीआरपी रायपुर के अधिकारियों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय पुलिस के लिए प्रोत्साहन है और इससे रेलवे परिसर में नशे के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की तस्करी पर निगरानी बढ़ाई गई है और प्लेटफार्मों पर गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।