Narayanpur. नारायणपुर। चंदन बघेल, जिला नारायणपुर के ग्राम पंचायत तुरठा के निवासी हैं। पूर्व में वे नक्सली संगठन से जुड़े हुए थे तथा नक्सली गतिविधियों में सम्मिलित रहे। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर उन्होंने आत्मसमर्पण किया और समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक सम्मानजनक जीवन जीने का निर्णय लिया। मुख्यधारा में लौटने के बाद शासन द्वारा उन्हें विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया। इसी क्रम में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास की स्वीकृति प्रदान की गई तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत् आजीविका डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया।
चंदन बघेल की आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। उनके पास लगभग 2 एकड़ असिंचित कृषि भूमि है, जिस पर वे वर्षाकाल में धान की खेती करते हैं। इसके अतिरिक्त वे साप्ताहिक हाट बाजारों में सब्जियों का विक्रय कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। खेती-किसानी एवं मेहनत-मजदूरी ही उनके परिवार की आय का प्रमुख स्रोत है। हालांकि, सिंचाई सुविधा के अभाव में उनकी कृषि गतिविधियाँ वर्षों पर निर्भर थीं, जिससे स्थायी एवं नियमित आजीविका सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती थी। इस समस्या के समाधान हेतु जिला प्रशासन द्वारा मनरेगा के अंतर्गत आजीविका डबटी निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया। संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से डबरी निर्माण कार्य पूर्ण कराया गया।
आजीविका के स्थायी साधन विकसित करने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग द्वारा डबरी में मत्स्य पालन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन एवं मछली बीज उपलब्ध कराने की कार्ययोजना बनाई गई है। वहीं उद्यानिकी विभाग द्वारा सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु तकनीकी सहयोग एवं आवश्यक कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। विभिन्न विभागों के इस अभिसरण (ब्वदअमतहमदबम) से चंदन बघेल को बहुआयामी आजीविका के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। आज चंदन बघेल आत्मनिर्भर जीवन की ओर अग्रसर हैं। शासन की पुनर्वास नीति एवं ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने उन्हें न केवल सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया है, बल्कि समाज के अन्य लोगों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि सही अवसर, सहयोग और दृढ़ संकल्प से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
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