छत्तीसगढ़
नाबालिग से रेप के बाद हत्या, आरोपी को कोर्ट ने सुनाई फ़ासी की सजा
Shantanu Roy
10 Sept 2026 8:21 PM IST

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Durg. दुर्ग। छह वर्षीय बालिका से दुष्कर्म और हत्या के गंभीर मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी सोमेश यादव को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय ने मामले को “विरलतम से विरलतम” श्रेणी का मानते हुए पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की दो प्रमुख धाराओं में मृत्युदंड दिया है। एक अन्य धारा में दोषी को पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने मृत बालिका के परिजनों को राज्य सरकार की पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 7 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का भी निर्देश दिया है।
मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र का है। 6 अप्रैल 2025 को 6 वर्ष 3 माह की बालिका के लापता होने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। संभावित स्थानों पर अलग-अलग पुलिस टीमों को भेजा गया और तकनीकी तथा मैदानी सूचनाओं की मदद ली गई। तलाश के दौरान पुलिस ने बालिका को एक वाहन से बरामद किया और तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर पंचनामा, पोस्टमार्टम सहित अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं शुरू कीं। मामले की संवेदनशीलता और बालिका की पहचान की गोपनीयता को देखते हुए अपराध से संबंधित अनावश्यक विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
वैज्ञानिक साक्ष्यों पर केंद्रित रही विवेचना
पुलिस के मुताबिक मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम गठित की गई। जांच में केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर निर्भर रहने के बजाय भौतिक, जैविक, चिकित्सकीय, इलेक्ट्रॉनिक और DNA साक्ष्यों को एकत्र कर वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ नजरी नक्शा तैयार किया गया। वहां से मिले महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित किया गया। आरोपी की पहचान के बाद उसे गिरफ्तार किया गया और उसके मेमोरेंडम कथन के आधार पर संबंधित वस्तुओं की बरामदगी एवं जब्ती की गई। आरोपी के कपड़ों सहित मामले से संबंधित सामग्री को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा गया। बालिका के आवश्यक जैविक नमूने, कपड़े और अन्य संबंधित सामग्री को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुरक्षित किया गया। इसके साथ ही आरोपी और संबंधित व्यक्तियों के DNA परीक्षण के लिए नमूने लिए गए। घटनास्थल और आसपास उपलब्ध CCTV फुटेज तथा DVR को भी जब्त कर जांच में शामिल किया गया। जब्त सामग्री को FSL और DNA परीक्षण के लिए भेजा गया। वहां से मिली वैज्ञानिक रिपोर्ट को चिकित्सकीय, इलेक्ट्रॉनिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर न्यायालय के सामने प्रस्तुत किया गया।
10 सितंबर को विशेष कोर्ट ने सुनाया फैसला
विशेष दाण्डिक प्रकरण पॉक्सो क्रमांक 44/2025 में अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफटीएससी, विशेष न्यायालय पॉक्सो दुर्ग ने 10 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। न्यायालय ने सोमेश यादव, उम्र 24 वर्ष, निवासी ओम नगर उरला, थाना मोहन नगर को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5(ड) एवं 5(ढ) सहपठित धारा 6(1) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 65(2) एवं 238(क) के तहत दोषसिद्ध किया। विशेष न्यायालय ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए इसे “विरलतम से विरलतम” श्रेणी का माना। पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत दोषी को मृत्युदंड तथा प्रत्येक धारा में 5-5 हजार रुपये का अर्थदंड दिया गया। इसके अतिरिक्त भारतीय न्याय संहिता की धारा 238(क) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
हाईकोर्ट से होगी मृत्युदंड की पुष्टि
मृत्युदंड के मामले में आगे की वैधानिक प्रक्रिया भी होगी। न्यायालयीन आदेश के अनुसार मृत्युदंड की पुष्टि संबंधी प्रक्रिया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर के समक्ष कानून के मुताबिक की जाएगी। इसका अर्थ है कि विशेष न्यायालय द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा आगे उच्च न्यायालय के समक्ष पुष्टि की वैधानिक प्रक्रिया से गुजरेगी।
परिवार को 7 लाख रुपये क्षतिपूर्ति
विशेष न्यायालय ने मृत बालिका के परिजनों को राज्य सरकार की पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 7 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान करने का भी निर्देश दिया है। पुलिस के अनुसार प्रकरण में कार्रवाई का उद्देश्य आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रखा गया। पीड़ित परिवार को न्यायिक प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के साथ प्रकरण को वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय के सामने पेश किया गया।
विशेष टीम ने की थी मामले की जांच
मामले में त्वरित कार्रवाई और विवेचना के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष टीम गठित की गई थी। टीम का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर ने किया। निरीक्षक एवं विवेचक शिव चंद्रा सहित मोहन नगर थाना और संबंधित पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों ने साक्ष्य संरक्षण, आरोपी की गिरफ्तारी, तकनीकी साक्ष्यों के संकलन तथा FSL और DNA परीक्षण से जुड़ी प्रक्रिया में भूमिका निभाई। न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने प्रकरण की पैरवी की।
बच्चों से जुड़े मामलों में तुरंत सूचना देने की अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से बच्चों के संबंध में किसी भी संदिग्ध गतिविधि, गुमशुदगी या अपराध की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में समय पर मिली सूचना तलाश और साक्ष्यों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण होती है। पुलिस ने महिला और बाल अपराधों के मामलों में त्वरित, संवेदनशील और वैज्ञानिक विवेचना सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है। मामला नाबालिग पीड़िता से संबंधित होने के कारण उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी गई है। बालिका का नाम, तस्वीर, पता या उसकी पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
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