ED का दावा: शराब नीति में हेरफेर कर बनाया गया 2883 करोड़ का सिंडिकेट

छग

Update: 2025-12-30 16:39 GMT
रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED), रायपुर ने 26 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में एक और सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है, जिसमें वर्ष 2019 से 2023 के बीच राज्य के आबकारी विभाग में हुए बड़े पैमाने के भ्रष्टाचार का विस्तृत खुलासा किया गया है। ED के अनुसार इस घोटाले से करीब 2883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई यानी प्रोसीड्स ऑफ क्राइम (POC) अर्जित की गई।
ED के आधिकारिक बयान में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र चैतन्य बघेल को इस पूरे घोटाले का “पॉलिटिकल एग्जीक्यूटिव” बताया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन राजनीतिक चेहरों ने नीतिगत स्तर पर सहमति और संरक्षण देकर इस अवैध सिंडिकेट को संचालित होने में मदद की।
प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ रही तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया को पूरे घोटाले की “की कोऑर्डिनेटर” करार दिया है। ED के अनुसार सौम्या चौरसिया अवैध नकदी के प्रबंधन, अधिकारियों की पोस्टिंग और घोटाले से जुड़े नेटवर्क के समन्वय में अहम भूमिका निभा रही थीं।
ED की जांच में सामने आया है कि यह शराब घोटाला एक संगठित सिंडिकेट के जरिए अंजाम दिया गया, जिसमें नौकरशाह, राजनेता और निजी कारोबारी शामिल थे। अवैध कमीशन, बिना हिसाब की शराब बिक्री, डिस्टिलरी कंपनियों से कार्टेल कमीशन और विदेशी शराब के लिए विशेष लाइसेंस व्यवस्था के जरिए भारी मात्रा में काला धन पैदा किया गया।
कार्रवाई के तहत ED ने अब तक 382.82 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अटैच किया है। इसमें रायपुर स्थित होटल वेलिंगटन कोर्ट सहित ढेबर परिवार और बघेल परिवार से जुड़ी 1000 से अधिक संपत्तियां शामिल हैं। ED का दावा है कि ये सभी संपत्तियां शराब घोटाले से अर्जित अवैध धन से खरीदी गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन और राजनीति की मिलीभगत से किया गया संगठित भ्रष्टाचार है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे तथा सख्त कार्रवाई संभव है।
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