फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट से मिली थी नौकरी, डॉ. सामंतक टंडन बर्खास्त

छग

Update: 2025-08-31 18:26 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। नेत्र सहायक की नौकरी पाने के लिए डॉ. सामंतक कुमार टंडन ने फर्जी श्रवण बाधित प्रमाण पत्र (हियरिंग डिसएबिलिटी सर्टिफिकेट) प्रस्तुत किया था। शिकायत और जांच के बाद सच्चाई उजागर हुई, जिसके बाद विभाग ने कड़ा कदम उठाते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोटिया निवासी प्रदीप कुमार ने स्वास्थ्य विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि डॉ. सामंतक ने नकली मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर दिव्यांगता कोटे से नौकरी हासिल की है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन ने इसकी जांच के आदेश दिए।
फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे नियुक्ति
जांच में यह तथ्य सामने आया कि डॉ. सामंतक ने नियुक्ति से पहले खुद को श्रवण बाधित दिखाते हुए प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। इसी के आधार पर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोहर्सी (मस्तूरी) में नेत्र सहायक के पद पर नियुक्त किया गया था। राज्य शासन ने पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए मेडिकल बोर्ड से नए सिरे से श्रवण क्षमता परीक्षण कराया। परीक्षण में साफ हुआ कि डॉ. सामंतक की सुनने की क्षमता पूरी तरह सामान्य है। इसका मतलब यह था कि नौकरी पाने के लिए प्रस्तुत किया गया प्रमाण पत्र फर्जी था।
बर्खास्तगी का आदेश जारी
जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपी गई। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से डॉ. सामंतक को दोषी पाया गया। इसके आधार पर संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. स्वाति वंदना सिसोदिया ने आदेश जारी करते हुए उनकी नौकरी से बर्खास्तगी की कार्रवाई की।
कर्मचारी संघ ने उठाई व्यापक जांच की मांग
इस पूरे प्रकरण के बाद छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने सरकार से मांग की है कि सिर्फ डॉ. सामंतक पर ही नहीं, बल्कि फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले चिकित्सक पर भी कड़ी कार्रवाई की जाए। संगठन ने कहा है कि दिव्यांग कोटे से नौकरी पाने वाले सभी कर्मचारियों की नए सिरे से मेडिकल बोर्ड द्वारा जांच कराई जानी चाहिए ताकि और कोई फर्जीवाड़ा सामने आए तो उस पर भी कार्रवाई हो सके।
मुंगेली जिला सरकार के राडार पर
जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के मामले सिर्फ बिलासपुर तक सीमित नहीं हैं। मुंगेली जिला इस मामले में सबसे आगे बताया जा रहा है। यहां शिक्षा विभाग समेत कई अन्य सरकारी दफ्तरों में करीब तीन दर्जन कर्मचारी और शिक्षक संदिग्ध पाए गए हैं। इन पर भी सरकार की नजर है और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी जा रही है।
हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने वालों का मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है। इस पूरे मुद्दे पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में विस्तृत जवाब तलब किया है। इस पूरे प्रकरण ने छत्तीसगढ़ की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिव्यांग कोटे का फायदा उठाने के लिए फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का सहारा लेना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि वास्तविक दिव्यांग उम्मीदवारों के हक पर डाका डालने जैसा है। अब देखना होगा कि सरकार इस तरह के फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए कौन से ठोस कदम उठाती है।
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