Raipur. रायपुर। रायपुर के सरस्वती नगर थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक किरायेदार के साथ खुलेआम ज्यादती की गई, लेकिन पुलिस कार्रवाई से पीछे हट गई। आरोप है कि एक बड़ा जमीन दलाल दुबे बताया जा रहा है, जिसने एक किरायेदार की दुकान में जबरन घुसकर उसे खाली करवा दिया। खास बात यह है कि यह सारा मामला सरस्वती नगर थाना इलाके का है और थाने से महज़ कुछ कदम की दूरी पर ही जमीन दलालों ने इस वारदात को अंजाम दिया है।
पीड़ित किरायेदार का कहना है कि वह कई वर्षों से इस जगह पर वैध रूप से दुकानदारी कर रहा है। बीते रविवार की रात को जमीन दलाल ने पीछे से दुकान की दीवार में सेंध लगाकर जबरन अंदर घुसपैठ की और शटर को वेल्डिंग कर बंद करवा दिया। यह पूरा घटनाक्रम CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हुआ है और इसके स्पष्ट सबूत मौजूद हैं। इसके बावजूद, सरस्वती नगर थाना प्रभारी ने एफआईआर दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया।
सरस्वती थाना प्रभारी रविंद्र कुमार का कहना है कि इस मामले में कोई अपराध बनता ही नहीं है और इसलिए यह केस न्यायालय में भेज दिया गया है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, बिना किसी वैध प्रक्रिया के दुकान को जबरन खाली कराना, और किरायेदार की संपत्ति में घुसपैठ करना, यह गंभीर आपराधिक श्रेणियों जैसे कि चोरी, डकैती, और आपराधिक अतिक्रमण में आता है।
प्रश्न यह उठता है कि जब सीसीटीवी फुटेज जैसा अहम सबूत मौजूद है, तब पुलिस कार्रवाई करने से पीछे क्यों हट रही है? क्या थाने में बैठे अधिकारियों पर किसी प्रकार का दबाव है या दलाल की पहुंच इतनी मजबूत है कि पुलिस भी चुप्पी साधे बैठी है? इस मामले ने पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल खड़े किए हैं।
रायपुर शहर में अब दुकानदार किरायेदारों के लिए मकान मालिक को न्यायालय तक जाने की ज़रूरत नहीं बस पुलिस को सेट करो और पुलिस के संज्ञान में मामला आते ही किरायेदार को पुख़्ता सबूतों के साथ ख़ाली कराओ। पुलिस किरायेदार की शिकायत पर न्यायधीश बनकर फ़ैसला सुनाएगी और कोई अपराध नहीं होगा। ये बताते हुए पुलिस न्यायालय का फैना काटकर दे देती है और गंभीर अपराध के तहत बलात प्रवेश, डकैती जैसे मामले को ना मानते हुए केस को रफ़ा दफ़ा करने के लिए न्यायालय जैसा फ़ैसला दे देती है। इसी तरह का यह मामला सरस्वती थाने का सामने आया है जो उदाहरण है कि सरस्वती नगर के थाना क्षेत्र की पुलिस ने पेश किया है। इस भू माफ़िया के पीछे कौन है, किसके इशारे पर ग़ैर क़ानूनी काम अवैध क़ब्ज़ा मानकर किरायेदार को दादागिरी के साथ ख़ाली कराने का प्रयास किया गया ये जांच का विषय है।