Raigarh रायगढ़। छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “साइबर जागृति अभियान” का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। जागरूकता अभियान के चलते लोग साइबर ठगी के नए तरीकों को पहचानने लगे हैं और ठगी के प्रयासों की जानकारी तुरंत पुलिस को दे रहे हैं। इसी कड़ी में रायगढ़ के एक रिटायर्ड शिक्षक और केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त अधिकारी तिलक कुमार कटकवार ने साइबर ठगी के प्रयास को नाकाम कर पुलिस को इसकी सूचना दी। उन्होंने साइबर ठगों के डराने-धमकाने वाले तरीके को समझा और बिना घबराए पुलिस तक पहुंचे।
जानकारी के अनुसार, 8 सितंबर 2026 की शाम तिलक कुमार कटकवार के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई स्थित सेंट्रल कमिश्नर कार्यालय का अधिकारी बताया। कॉलर ने दावा किया कि दो आतंकवादी पकड़े गए हैं और उनके पास से तिलक कुमार कटकवार के नाम से जुड़ा सिम कार्ड मिला है। इसके बाद आरोपी ने उन्हें आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का डर दिखाकर धमकाने की कोशिश की।
हालांकि, रिटायर्ड शिक्षक ने ठग की बातों पर भरोसा नहीं किया। उन्होंने धैर्य बनाए रखा और स्पष्ट रूप से कहा कि वह किसी भी झांसे में नहीं आने वाले हैं। इसके बाद उन्होंने सीधे पुलिस कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। तिलक कुमार कटकवार ने आम लोगों से अपील की कि ऐसे फर्जी कॉल से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंक खाता, एटीएम, ओटीपी, यूपीआई, आधार या अन्य निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारी बनकर गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकवादी मामले में फंसाने की धमकी देना साइबर ठगों का नया तरीका है। ऐसे मामलों में तुरंत कॉल काटकर पुलिस या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देनी चाहिए। कई क्षेत्रों में चला साइबर जागरूकता अभियान
रायगढ़ जिले में घरघोड़ा, खरसिया और तमनार क्षेत्र में भी साइबर जागृति अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। पुलिस ने लोगों को साइबर अपराध से बचने के तरीके बताए और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने की अपील की। पुलिस ने लोगों को “साइबर अवेयरनेस सेल्फी” अभियान से जुड़ने के लिए भी प्रेरित किया, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंच सके।
गांवों से क्रिकेट मैदान तक पहुंचा जागरूकता संदेश
पूंजीपथरा पुलिस ने छर्राटांगर, सराईपाली और पूंजीपथरा क्षेत्र में पोस्टर-बैनर के माध्यम से लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया। पुलिस टीम क्रिकेट टूर्नामेंट में मौजूद युवाओं के बीच भी पहुंची और ऑनलाइन ठगी से बचने के उपाय बताए। युवाओं को ऑनलाइन गेमिंग, फर्जी नौकरी, लोन ऐप, सोशल मीडिया फ्रेंड रिक्वेस्ट, फर्जी निवेश और यूपीआई ठगी से सावधान रहने की सलाह दी गई।
पुलिस ने बताया कि “डिजिटल गिरफ्तारी” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। अगर कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी सरकारी अधिकारी के नाम पर वीडियो कॉल कर डराए या पैसे जमा करने का दबाव बनाए तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें।
रायगढ़ पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। अभियान के माध्यम से लगातार लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति सजग किया जा रहा है।
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