Durg. दुर्ग। लगातार आपराधिक गतिविधियों और पूर्व में की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों के बावजूद गतिविधियां जारी रहने के आधार पर पुलगांव थाना क्षेत्र निवासी मनीष माण्डले के खिलाफ एक बार फिर जिलाबदर की कार्रवाई की गई है। जिला दण्डाधिकारी दुर्ग ने छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 5 के तहत 24 सितंबर 2026 को आदेश जारी करते हुए उसे एक वर्ष के लिए दुर्ग समेत सात जिलों की सीमाओं में बिना अनुमति प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया है। आदेश के अनुसार मनीष माण्डले को दुर्ग, रायपुर, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, बालोद और धमतरी जिले की सीमाओं से आदेश की तारीख से एक सप्ताह के भीतर बाहर जाने के निर्देश दिए गए हैं। एक वर्ष की अवधि तक वह सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना इन जिलों की सीमाओं में प्रवेश नहीं कर सकेगा।
पुलिस के मुताबिक, मनीष माण्डले नागदेवता चौक, नगपुरा, चौकी नगपुरा, थाना पुलगांव का निवासी है। उसके खिलाफ वर्ष 2013 से विभिन्न आपराधिक प्रकरण दर्ज होने का उल्लेख जिलाबदर संबंधी कार्रवाई में किया गया है। रिकॉर्ड के मुताबिक उसके विरुद्ध मारपीट से संबंधित छह, छेड़छाड़ से संबंधित एक और आबकारी एक्ट के तहत एक प्रकरण दर्ज है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पहला मामला वर्ष 2013 में दर्ज हुआ था। अपराध क्रमांक 501/2013 में भारतीय दंड संहिता की धारा 294, 506, 323 और 34 के तहत कार्रवाई की गई थी। इसके बाद वर्ष 2015 में अपराध क्रमांक 05/2015 और वर्ष 2016 में अपराध क्रमांक 386/2016 तथा 502/2016 दर्ज किए गए। ये मामले मारपीट और उससे संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किए गए थे।
वर्ष 2018 में अपराध क्रमांक 135/2018 के तहत धारा 354, 354(क) और 506 भादवि में महिला से छेड़छाड़ और धमकी से संबंधित प्रकरण दर्ज किया गया। वर्ष 2021 में अपराध क्रमांक 509/2021 के तहत मारपीट से संबंधित मामला दर्ज हुआ। इसके बाद वर्ष 2023 में अपराध क्रमांक 535/2023 के तहत आबकारी एक्ट की धारा 36 में प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2025 में भी अपराध क्रमांक 489/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 115(2), 351(3) और 3(5) में मारपीट से संबंधित प्रकरण दर्ज किया गया। इन मामलों और अन्य अभिलेखों को आधार बनाते हुए पुलिस की ओर से जिलाबदर का प्रकरण तैयार किया गया।
पुलिस का कहना है कि वर्ष 2013 से मनीष माण्डले की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए समय-समय पर वैधानिक और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। संबंधित आपराधिक मामलों में विवेचना पूरी कर अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। अपराधों की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतिबंधात्मक प्रावधानों के तहत भी न्यायालय में इस्तगासा पेश किए गए। पुलिस ने निगरानी के उद्देश्य से मनीष माण्डले को गुंडा बदमाश सूची में भी शामिल किया था। इससे पहले 12 नवंबर 2018 को भी जिला दण्डाधिकारी दुर्ग के आदेश पर उसके खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई की गई थी। पुलिस के अनुसार इसके बाद भी उसके खिलाफ मामले सामने आने के कारण वर्ष 2025 और 2026 में प्रतिबंधात्मक प्रकरणों में इस्तगासा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
इसके बाद पुलगांव पुलिस ने जिलाबदर की कार्रवाई के लिए मनीष माण्डले का आपराधिक चार्ट, जरायम सूची और संबंधित दस्तावेजों के साथ प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रकरण में अभियोजन साक्षियों को नोटिस जारी कर उनके कथन भी दर्ज किए गए। उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद जिला दण्डाधिकारी ने 24 सितंबर को जिलाबदर का आदेश पारित किया। आदेश के तहत मनीष माण्डले को एक सप्ताह के भीतर सातों जिलों की सीमाओं से बाहर जाने को कहा गया है। इसके बाद एक वर्ष तक बिना अनुमति दुर्ग, रायपुर, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, बालोद और धमतरी जिले में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। आदेश के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरी कार्रवाई में थाना पुलगांव के थाना प्रभारी गुरविंदर सिंह संधू और चौकी नगपुरा के उप निरीक्षक खेलन सिंह साहू की भूमिका रही। पुलिस के अनुसार अधिकारियों ने संबंधित आपराधिक अभिलेख और दस्तावेज प्रस्तुत करने के साथ अभियोजन साक्षियों के कथन दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी की। दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि क्षेत्र में किसी व्यक्ति द्वारा लगातार मारपीट, धमकी, छेड़छाड़ या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली अन्य गतिविधियां किए जाने की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें। पुलिस का कहना है कि प्राप्त सूचना के आधार पर जांच कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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