आर्थिक लाभ का झांसा देकर लोगों के नाम पर कराते थे फाइनेंस, 2 आरोपी गिरफ्तार
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Durg. दुर्ग। जरूरतमंद लोगों को आर्थिक लाभ और सहायता का झांसा देकर उनके नाम पर वाहन एवं अन्य सामग्री फाइनेंस कराने और बाद में उन्हें कम कीमत पर बेचने के आरोप में दुर्ग पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है। चौकी स्मृतिनगर पुलिस ने धोखाधड़ी के इस मामले की जांच करते हुए आरोपियों की निशानदेही पर आठ वाहन और एक वॉशिंग मशीन सहित कुल नौ सामान बरामद किए हैं। पुलिस ने बरामद सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपए बताई है। पुलिस के मुताबिक, मामले की शिकायत भिलाई नगर निवासी 32 वर्षीय मनीष डहेरवाल ने 21 सितंबर 2026 को चौकी स्मृतिनगर में दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों ने छल-कपट कर मनीष और उसके परिचितों के नाम पर वाहन एवं अन्य सामग्री फाइनेंस कराई। इसके बाद फाइनेंस कराई गई वस्तुओं का दूसरे लोगों के साथ सौदा कर दिया गया, जिससे उनके नाम पर फाइनेंस लेने वाले लोगों को आर्थिक और संपत्ति संबंधी नुकसान हुआ।
शिकायत मिलने के बाद स्मृतिनगर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में धोखाधड़ी से संबंधित तथ्य सामने आने के बाद चौकी स्मृतिनगर, थाना सुपेला में अपराध क्रमांक 1408/2026 दर्ज किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की और आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस ने दो संदिग्धों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद जसमीत सिंह उर्फ प्रिंस, उम्र 28 वर्ष, निवासी कैलाश नगर, जामुल, भिलाई और भोजराज राय उर्फ भोजू, उम्र 26 वर्ष, निवासी सतनाम भवन, मंगल बाजार के पास, कोहका, भिलाई को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस का आरोप है कि दोनों जरूरतमंद लोगों को आर्थिक लाभ दिलाने और उनकी सहायता करने का भरोसा देते थे। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को अपने नाम पर वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या अन्य सामग्री फाइनेंस कराने के लिए तैयार किया जाता था। लोगों का विश्वास हासिल करने के लिए फाइनेंस के समय लगने वाला डाउन पेमेंट खुद जमा करने और आगे की मासिक किस्त यानी EMI भरने का आश्वासन दिया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति के नाम पर फाइनेंस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वाहन या अन्य सामग्री आरोपियों के कब्जे में आ जाती थी। इसके बाद कथित रूप से उसे बाजार मूल्य से कम कीमत पर किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया जाता था। सामान बेचने से मिलने वाली रकम को आरोपी आपस में बांट लेते थे, जबकि फाइनेंस और किस्तों का दायित्व उस व्यक्ति के नाम पर बना रहता था जिसके दस्तावेजों से सामान खरीदा गया था। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर अलग-अलग स्थानों से कुल आठ वाहन और एक वॉशिंग मशीन बरामद करने का दावा किया है। इस प्रकार कुल नौ सामान की बरामदगी हुई है, जिनकी संयुक्त अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपए बताई गई है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने कितने लोगों को इस तरह अपने जाल में फंसाया और उनके नाम पर कितने वाहन या अन्य सामान फाइनेंस कराए गए। प्रकरण से जुड़े अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही शेष सामान की तलाश और बरामदगी की कार्रवाई जारी है। पुलिस के अनुसार विवेचना के दौरान यह भी जांच की जा रही है कि फाइनेंस कराए गए वाहन और अन्य सामान किन लोगों को बेचे गए थे और इस पूरी प्रक्रिया में आरोपियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मामले की त्वरित विवेचना, आरोपियों की पतासाजी और करीब 10 लाख रुपए की सामग्री बरामद करने में चौकी स्मृतिनगर और थाना सुपेला में पदस्थ पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका रही। दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी दूसरे व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या अन्य वस्तु फाइनेंस कराने से पहले उसके वास्तविक उद्देश्य और भुगतान की जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझ लें। अपने दस्तावेज और वित्तीय जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को देने में सावधानी बरतें। किसी संदिग्ध गतिविधि या फाइनेंस के नाम पर धोखाधड़ी की आशंका होने पर तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपील की गई है।