छत्तीसगढ़ में नया धर्म स्वातंत्र्य कानून, सख्त प्रावधानों के साथ धर्मांतरण पर कड़ी निगरानी

Update: 2026-04-20 03:57 GMT

रायपुर। प्रदेश में अवैध धर्मांतरण को लेकर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति जबरन, प्रलोभन या धोखाधड़ी के माध्यम से धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसे 7 से 10 साल तक की सजा और जुर्माना भुगतना होगा। वहीं सामूहिक धर्मांतरण या विशेष श्रेणी के लोगों (महिला, नाबालिग, एससी/एसटी) के मामलों में सजा और भी कड़ी रखी गई है, जो 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक हो सकती है।

कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि धर्मांतरण की प्रक्रिया को नियंत्रित और पारदर्शी बनाया जाएगा। इसके तहत धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित व्यक्ति को अधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन देना अनिवार्य होगा। आवेदन के बाद उसकी सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। जांच पूरी होने के बाद ही धर्म परिवर्तन को वैध माना जाएगा।

इसके अलावा, धर्मांतरण कराने वाले संस्थानों और व्यक्तियों के लिए पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। उन्हें हर साल विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपनी होगी। ग्रामसभा की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है, ताकि स्थानीय स्तर पर निगरानी बनी रहे। कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल विवाह के आधार पर धर्म परिवर्तन मान्य नहीं होगा। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होगा। साथ ही, अगर कोई व्यक्ति अपने मूल धर्म में वापस लौटता है, तो उसे धर्मांतरण की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित किए जाने को राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संतुलन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले कुछ समय से समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाकर प्रलोभन, दबाव अथवा भ्रम फैलाकर धर्मांतरण कराने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि नए विधेयक के लागू होने से ऐसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा और समाज में संतुलन तथा विश्वास कायम रहेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब धर्म परिवर्तन से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया को विधिसम्मत और पारदर्शी बनाना अनिवार्य होगा। इसके तहत संबंधित पक्षों को पूर्व में ही प्राधिकृत अधिकारी को सूचित करना होगा, जिसके बाद आवेदन की सार्वजनिक सूचना जारी कर निर्धारित समयसीमा में उसका परीक्षण किया जाएगा। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि धर्मांतरण किसी भी प्रकार के प्रलोभन, दबाव या अनुचित प्रभाव के बिना ही किया जाए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्व में लागू कानून अपेक्षाकृत कम प्रभावी था, जिसके कारण अवैध गतिविधियों को रोकने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। नए प्रावधानों में कठोर दंडात्मक व्यवस्थाएं जोड़ी गई हैं, जिससे ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई संभव होगी। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित धर्मांतरण से कई बार सामाजिक असंतुलन और अशांति की स्थिति उत्पन्न होती है। इस विधेयक के माध्यम से राज्य में शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा को और सुदृढ़ किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता को भरोसा दिलाया कि यह विधेयक प्रदेश में पारदर्शिता, न्याय और सामाजिक एकता को मजबूती देगा तथा छत्तीसगढ़ को एक सशक्त, संतुलित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

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