रिश्वत लेते पकड़े गए एसडीओ, पटवारी समेत 5 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश

छग

Update: 2026-07-20 18:42 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिश्वतखोरी के पांच मामलों में आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया है। एसीबी की अलग-अलग इकाइयों ने एसडीओ, पटवारी, दो बाबू और एक कर्मचारी के खिलाफ विशेष न्यायालयों में चालान प्रस्तुत किया है। सभी आरोपी सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगते और लेते हुए एसीबी की ट्रैप कार्रवाई में रंगे हाथ पकड़े गए थे।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, इन मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई की गई है। जांच पूरी होने के बाद अब आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहले मामले में एसीबी इकाई अंबिकापुर ने जशपुर जिले के मनोरा जनपद पंचायत में पदस्थ प्रभारी एसडीओ और उप अभियंता संजय कुमार दिवाकर के खिलाफ विशेष न्यायालय जशपुर में अभियोग पत्र पेश किया है।
यह मामला ग्राम कपरोल हड़िकोना निवासी रितु राम यादव की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत कपरोल में मनरेगा योजना वर्ष 2022-23 के तहत कराए गए गेजबियन संरचना कार्य की मूल्यांकन रिपोर्ट का सत्यापन और बिल भुगतान करने के बदले एसडीओ संजय कुमार दिवाकर ने 25 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने योजना बनाकर कार्रवाई की और आरोपी अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब मामले में अभियोग पत्र विशेष न्यायालय जशपुर में प्रस्तुत किया गया है।
दूसरे मामले में एसीबी बिलासपुर इकाई ने नगर पंचायत नवागढ़ के बाबू प्रकाश जायसवाल के खिलाफ विशेष न्यायालय जांजगीर-चांपा में अभियोग पत्र दाखिल किया है। यह कार्रवाई नवागढ़ निवासी अब्दुल वहाब की शिकायत पर की गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि नगर पंचायत क्षेत्र में अधोसंरचना मद के तहत किए गए कार्यों के भुगतान के लिए चेक जारी कराने के एवज में बाबू ने 16 हजार रुपये रिश्वत मांगी थी। आरोपी ने पहली किस्त के रूप में 6 हजार रुपये ले लिए थे। इसके बाद दूसरी किस्त के रूप में 10 हजार रुपये लेते समय एसीबी की टीम ने उसे पकड़ लिया था। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
तीसरे मामले में एसीबी ने तहसील कार्यालय छाल, जिला रायगढ़ में पदस्थ बाबू तुलाराम पटेल के खिलाफ विशेष न्यायालय रायगढ़ में अभियोग पत्र पेश किया है। इस मामले में धसकामुड़ा निवासी भानु प्रताप पटेल ने एसीबी में शिकायत की थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राजस्व रिकॉर्ड में नाम सुधार का कार्य कराने के बदले आरोपी बाबू ने 60 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। एसीबी की कार्रवाई में तुलाराम पटेल को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था।
चौथे मामले में एसीबी रायपुर ने बेमेतरा जिले के साजा तहसील अंतर्गत ग्राम बोड़ के पटवारी ओंकार प्रसाद सोनवानी के खिलाफ विशेष न्यायालय बेमेतरा में अभियोग पत्र पेश किया है। यह मामला ग्राम बोड़ निवासी नरोत्तम साहू की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया था कि जमीन के बटांकन, खाता विभाजन और ऋण पुस्तिका बनाने के बदले पटवारी ने 15 हजार रुपये रिश्वत मांगी थी। एसीबी ने कार्रवाई करते हुए पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। आरोपी पटवारी के खिलाफ अपराध क्रमांक 24/2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब इस मामले में न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया है।
पांचवें मामले में एसीबी रायपुर ने धमतरी जिले में पदस्थ प्रोग्रेसमेन लकेश्वर साहू के खिलाफ विशेष न्यायालय धमतरी में अभियोग पत्र दाखिल किया है। यह कार्रवाई ग्राम मेचका, तहसील नगरी निवासी गुमान सिंह की शिकायत पर की गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि ग्रेच्यूटी राशि के भुगतान के लिए आरोपी कर्मचारी ने एक लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी। एसीबी ने योजना बनाकर आरोपी को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा-7 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। अब मामले में न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र पेश किया गया है। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कामकाज में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। ट्रैप कार्रवाई के बाद जांच पूरी कर आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं, ताकि दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाई जा सके। एसीबी ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है तो इसकी सूचना तत्काल एसीबी को दें। शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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