CG: लोन फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़, निजी डेटा के सहारे ठगी की तैयारी, 3 गिरफ्तार

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Update: 2026-06-24 18:55 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। सिविल लाइन पुलिस ने लोन दिलाने के नाम पर लोगों की निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल कर ठगी की तैयारी करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने अग्रसेन चौक स्थित सुपर मार्केट में संचालित ट्रस्ट फाइनेंशियल सर्विसेज कार्यालय पर छापा मारकर संचालिका सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने करीब एक लाख लोगों का निजी डेटा अवैध रूप से खरीदकर उसका उपयोग लोगों को कॉल करने और लोन दिलाने का झांसा देने के लिए किया था। इस नेटवर्क के जरिए बड़ी संख्या में लोगों से संपर्क किया जा रहा था।
मामला ईदगाह चौक निवासी एक व्यक्ति की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में बताया गया था कि ट्रस्ट फाइनेंशियल सर्विसेज के कर्मचारी मोबाइल फोन के माध्यम से लोगों को पर्सनल, होम, बिजनेस और वाहन लोन दिलाने का प्रलोभन दे रहे हैं। सूचना मिलने के बाद सिविल लाइन थाना प्रभारी किशोर केवट ने वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति से कार्यालय में दबिश दी। छापेमारी के दौरान पूछताछ में पूरे डेटा नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस ने कार्यालय संचालिका उषा कश्यप, अमन राठौर और शेख जुनैद खान को गिरफ्तार किया है। तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 62, 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 72(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जांजगीर-चांपा निवासी उषा कश्यप पिछले लगभग एक वर्ष से यह कार्यालय चला रही थी और लोन दिलाने के नाम पर लोगों को झांसे में लेने का काम कर रही थी। वहीं, सीपत निवासी शेख जुनैद खान लोगों से रियल एस्टेट संबंधी जानकारी जुटाने के बहाने उनके मोबाइल नंबर और निजी विवरण एकत्र करता था। इसके अलावा सरकारी विभागों और ऑनलाइन डायरेक्टरी से भी डेटा जुटाया जा रहा था। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि अमन राठौर ने लगभग एक लाख लोगों का नाम, पता और मोबाइल नंबर का डेटा मात्र 5 हजार रुपये में उषा कश्यप को बेचा था। इस डेटा का उपयोग कॉल सेंटर जैसे तरीके से लोगों को लोन का लालच देने में किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इतनी बड़ी मात्रा में डेटा विभिन्न अनधिकृत स्रोतों से जुटाया गया था। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि यह डेटा किन माध्यमों से हासिल किया गया और इसका उपयोग किन-किन लोगों तक पहुंचने में हुआ। सिविल लाइन पुलिस ने बताया कि मामले की गहराई से जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि क्या इस गिरोह ने किसी व्यक्ति के साथ प्रत्यक्ष रूप से ठगी की घटना को अंजाम दिया है या नहीं। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या लोन ऑफर पर भरोसा न करें और अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
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