CG BREAKING: 20 लाख के इनामी नक्सली दंपती ने किया आत्मसमर्पण

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Update: 2025-11-26 13:47 GMT
Rajnandgaon. राजनांदगांव। मध्यप्रदेश–महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ (एमएमसी) जोन में चल रहे संयुक्त माओवादी विरोधी अभियान को बुधवार को बड़ी सफलता मिली है। टाडा-मलाजखंड एरिया में सक्रिय 20 लाख रुपये इनामी नक्सली दंपती—14 लाख का इनामी हार्डकोर नक्सली धनुष उर्फ मुन्ना (25) और 6 लाख की इनामी महिला नक्सली रोनी उर्फ तुले (25) ने खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले के पुलिस अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह दंपती लंबे समय से भाकपा (माओवादी) के माड़ डिवीजन और एमएमसी जोन की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025, बढ़ते विकास कार्यों और समुदाय आधारित पुलिसिंग के प्रभाव से प्रेरित होकर दोनों नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह सरेंडर न केवल क्षेत्र की सुरक्षा रणनीति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि माओवादी नेटवर्क को एक बड़ा झटका भी है।

कई वारदातों और माओवादी कैंपों से जुड़े रहे थे दोनों
धनुष और रोनी पिछले कई वर्षों से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र (गोंदिया) और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती घने जंगलों में सक्रिय थे। दोनों एरिया डामिनेशन, सुरक्षा बलों के मूवमेंट पर निगरानी, विस्फोटक-सामग्री की ढुलाई, रणनीतिक बैठकों में भागीदारी, नए कैडरों की भर्ती और कैडरों की निगरानी जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाते थे। धनुष, संगठन का एक प्रमुख सदस्य, तकनीकी और कम्युनिकेशन यूनिट का अहम हिस्सा था। उसे हिंदी, अंग्रेजी टाइपिंग और कंप्यूटर संचालन का उत्कृष्ट ज्ञान था। इसीलिए वह माओवादी माड़ डिवीजन और एरिया कमेटी बैठकों के दस्तावेजीकरण, आदेश-पत्र, और गुप्त कम्युनिकेशन नेटवर्क (दंडकारण्य कम्युनिकेशन चैनल) को संभालने वाला प्रमुख कैडर बन गया था। दूसरी ओर, रोनी महिला माओवादी यूनिट की सक्रिय सदस्य थी और एमएमसी जोन प्रभारी रामदेर (सीसी मेंबर) की विश्वस्त कैडर थी। वह दवाइयों व राशन आपूर्ति, महिला मिलिट्री डिवीजन की गतिविधियों, कैंप शिफ्टिंग, और स्थानीय जनसंपर्क इकाइयों में बेहद प्रभावी भूमिका निभाती थी।

सुरक्षा बलों की लगातार बढ़त से कमजोर हुआ माओवादी तंत्र
सुरक्षा एजेंसियों ने हाल के महीनों में एमएमसी जोन, माड़ डिवीजन और टाडा-मलाजखंड एरिया में लगातार सफल ऑपरेशन चलाए हैं। 19 नवंबर से इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने एरिया डॉमिनेशन बढ़ाया है, जिसके बाद माओवादी कैडरों की गतिविधियाँ सीमित होने लगी हैं। दबाव और संसाधनों की कमी के बीच संगठन से मोहभंग बढ़ा है। पुलिस के अनुसार, सरेंडर कर चुके यह दोनों नक्सली कई वारदातों में शामिल थे और संगठन के लिए महत्वपूर्ण संसाधन और रणनीतिक भूमिका निभाते थे। इनके आत्मसमर्पण के बाद माओवादी कम्युनिकेशन, लॉजिस्टिक और भर्ती नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ना तय है। धनुष-रोनी दंपती के आत्मसमर्पण के बाद एमएमसी जोन में माओवादी प्रभाव और कमजोर होगा। दोनों संगठन के लिए अत्यधिक विश्वस्त और प्रशिक्षित कैडर थे, जिनके बाहर आने से माओवादी रणनीति को बड़ा नुकसान पहुंचेगा। सुरक्षा एजेंसियाँ उम्मीद कर रही हैं कि इनकी वापसी से अन्य कैडरों को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिलेगी।
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