CG BREAKING: शराब घोटाले पर अदालत की सख्ती, पेशी से नदारद आरोपियों को भेजा नोटिस
छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में अब जांच ने और गति पकड़ ली है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने मामले में शामिल 28 आबकारी अधिकारियों के खिलाफ विशेष अदालत में 2300 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अब सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर 20 अगस्त 2025 को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है।
कोर्ट के समन के बावजूद पेश नहीं हुए आरोपी
चार्जशीट दाखिल करने से पहले EOW की ओर से सभी आरोपियों को समन भेजकर अदालत में हाजिर होने को कहा गया था, लेकिन कोई भी पेश नहीं हुआ। इसके बाद विशेष अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए अब सभी को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है।
पूर्व मंत्री कवासी लखमा पर संरक्षण का आरोप
जांच में सामने आया है कि यह घोटाला पूर्व मंत्री कवासी लखमा के संरक्षण में विभागीय अधिकारियों, ठेकेदारों और राजनीतिक रसूखदारों के गठजोड़ से हुआ। सरकारी धन का दुरुपयोग कर व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए। अब तक चार अभियोग पत्र, जिनमें से तीन पूरक हैं, कोर्ट में दाखिल किए जा चुके हैं। इस घोटाले में अब तक 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश और जांच अभी जारी है।
कवासी लखमा ED की गिरफ्त में, न्यायिक रिमांड पर रह चुके हैं
घोटाले में मुख्य आरोपी पूर्व मंत्री कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया था। उनसे कस्टोडियल रिमांड पर पूछताछ भी की गई और बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। अब तक की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाती रही है।
अनिल टुटेजा, यश टुटेजा और सौम्या चौरसिया भी जांच के घेरे में
इस घोटाले के तार तत्कालीन भूपेश सरकार के कई प्रभावशाली अधिकारियों और नेताओं से जुड़े पाए गए हैं।
पूर्व IAS अनिल टुटेजा,
उनके बेटे यश टुटेजा, और मुख्यमंत्री सचिवालय की तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया
के खिलाफ आयकर विभाग ने 2022 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
अनवर ढेबर और 'आपराधिक सिंडिकेट' का जिक्र
ED की जांच में बताया गया कि कैसे रायपुर के पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर ने एक आपराधिक सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया। 2017 में जब आबकारी नीति में बदलाव कर CSMCL के जरिए शराब बिक्री शुरू हुई, तब 2019 के बाद अनवर ढेबर ने अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का एमडी बनवाया और अधिकारियों, व्यापारियों व नेताओं के गठजोड़ से 2161 करोड़ का घोटाला किया गया।
EOW और ED के समन्वित प्रयास, न्याय की ओर बढ़ता केस
अब EOW की ओर से कोर्ट में चालान दाखिल किए जाने के बाद यह केस न्यायिक प्रक्रिया के निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। वहीं ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच भी जारी है, जिसमें अब जमीनों की खरीद, नकदी लेनदेन और बैंक खातों की जांच पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।