Raigarh. रायगढ़। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) राम गोपाल गर्ग की अध्यक्षता में दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय के मीटिंग हॉल में आयोजित हुई, जिसमें फरवरी 2026 में दर्ज उन मामलों की समीक्षा की गई, जिनमें आरोपियों को न्यायालय से दोषमुक्त (Acquittal) किया गया था। बैठक का मुख्य उद्देश्य विवेचना की कमियों की पहचान करना और न्यायिक प्रक्रिया में सुधार लाना था।
इस समीक्षा बैठक में जांजगीर की पुलिस अधीक्षक निवेदिता पाल (भा.पु.से.), बिलासपुर के प्रभारी संयुक्त संचालक अभियोजन आशीष झा, रायगढ़ के उप निदेशक अभियोजन वेद प्रकाश पटेल, कोरबा के उप निदेशक अभियोजन विवेक त्रिपाठी, जांजगीर के उप निदेशक अभियोजन श्याम लाल पटेल, मुंगेली की उप निदेशक अभियोजन पी.के. भगत, पेण्ड्रा के सहायक उप निदेशक अभियोजन संजीव राय तथा आईजी कार्यालय के उप पुलिस अधीक्षक विवेक शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में अभियोजन और विवेचना से जुड़े प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कई मामलों में विवेचना के दौरान प्रक्रियात्मक और तकनीकी त्रुटियां सामने आईं, जिसके कारण अभियोजन पक्ष कमजोर पड़ा और आरोपियों को न्यायालय से दोषमुक्ति मिल गई। इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। IG राम गोपाल गर्ग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विवेचना का स्तर आधुनिक कानून व्यवस्था और तकनीकी चुनौतियों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विवेचना में छोटी से छोटी चूक भी न्यायिक परिणाम को प्रभावित कर सकती है, इसलिए प्रत्येक मामले में साक्ष्यों का संकलन अत्यंत सावधानी और विधिक प्रक्रिया के अनुसार किया जाए।
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि जिन मामलों में अपील की संभावना है, उनमें समय पर संबंधित न्यायालयों में अपील दायर की जाए। साथ ही अभियोग पत्र (चालान) प्रस्तुत करने से पहले जिला अभियोजन अधिकारी से विधिवत स्वीकृति लेना अनिवार्य किया जाए तथा वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में ही अंतिम रूप से न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। बैठक के दौरान ई-साक्ष्य (Digital Evidence) और घटनास्थल की वीडियोग्राफी के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल साक्ष्यों का सही तरीके से उपयोग करने से मामलों में मजबूती आएगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
विशेष रूप से NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) मामलों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। IG ने निर्देश दिए कि नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक त्रुटि नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ऐसे मामलों में तकनीकी गलती से आरोपी को लाभ मिल सकता है और वह दोषमुक्त हो सकता है। उन्होंने विवेचकों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
अभियोजन विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2026 के दौरान सत्र न्यायालय में कुल 106 प्रकरण और अन्य न्यायालयों में 709 प्रकरणों की समीक्षा की गई, जिनमें दोषमुक्ति के मामले शामिल थे। इन मामलों का गहन विश्लेषण किया गया ताकि भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोका जा सके। IG राम गोपाल गर्ग ने कहा कि विवेचना में होने वाली छोटी-छोटी तकनीकी गलतियां न्याय व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। इसलिए आवश्यक है कि सभी विवेचक अपनी कार्यप्रणाली को अधिक सटीक, पारदर्शी और मजबूत बनाएं। उन्होंने कहा कि साक्ष्यों का सही संकलन, वैज्ञानिक जांच और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन ही सफल अभियोजन की कुंजी है।
उन्होंने सभी अधिकारियों से अपील की कि वे टीम भावना के साथ कार्य करें और अभियोजन तथा पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करें। इससे न केवल दोषमुक्ति के मामलों में कमी आएगी बल्कि सजा दर (Conviction Rate) में भी सुधार होगा। बैठक के अंत में IG ने कहा कि इस समीक्षा बैठक का उद्देश्य केवल कमियों को उजागर करना नहीं बल्कि भविष्य के लिए सुधारात्मक कदम तय करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में विवेचना की गुणवत्ता में सुधार होगा और न्यायिक प्रक्रिया अधिक मजबूत बनेगी।