छत्तीसगढ़

IPS संतोष सिंह ने संभाला CISF दक्षिण जोन-2 के DIG का पद

Shantanu Roy
29 April 2026 8:14 PM IST
IPS संतोष सिंह ने संभाला CISF दक्षिण जोन-2 के DIG का पद
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छग
New Delhi/Raipur. नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संतोष सिंह ने हैदराबाद स्थित मुख्यालय में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के दक्षिण जोन-2 के उप महानिरीक्षक (DIG) के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उनके इस नए दायित्व के तहत आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक में स्थित सीआईएसएफ द्वारा संरक्षित महत्वपूर्ण संस्थानों और इकाइयों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शामिल है। बताया गया है कि दक्षिण जोन-2 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाइयां, खनन क्षेत्र, बड़े कारखाने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और अन्य रणनीतिक प्रतिष्ठान आते हैं, जिनकी सुरक्षा का दायित्व अब संतोष सिंह के नेतृत्व में रहेगा। इसके साथ ही बंगाल और ओडिशा के कुछ प्रमुख बंदरगाहों की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी भी इसी जोन के अंतर्गत आती है।

जो इस पद की जिम्मेदारियों को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। संतोष सिंह के कार्यभार संभालने के साथ ही जोन में सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयास तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है। उनके अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए यह जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इस क्षेत्र में कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं। सीआईएसएफ देश के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों और अन्य महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार केंद्रीय बल है। ऐसे में दक्षिण जोन-2 जैसे बड़े क्षेत्र का नेतृत्व संभालना एक अहम प्रशासनिक दायित्व माना जाता है।

सूत्रों के अनुसार संतोष सिंह इससे पहले भी विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं और उन्हें सुरक्षा प्रबंधन का अच्छा अनुभव है। उनके नेतृत्व में जोन के अंतर्गत आने वाले सभी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उनकी नियुक्ति से संबंधित क्षेत्रों में सुरक्षा समन्वय और निगरानी को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। साथ ही विभिन्न राज्यों के प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल बढ़ाकर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। इस नियुक्ति को छत्तीसगढ़ कैडर के अधिकारियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्य के अधिकारियों की केंद्रीय स्तर पर भागीदारी और जिम्मेदारी में बढ़ोतरी का संकेत मिलता है।
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