Durg. दुर्ग। पुलिस विभाग में शासकीय नौकरी लगवाने का झांसा देकर 14 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने के मामले में दुर्ग पुलिस ने फरार आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने पीड़िता के पति को चालक और उसके भाई को आरक्षक के पद पर नौकरी दिलाने का भरोसा देकर कुल 14 लाख 1 रुपये की राशि हासिल की थी। शिकायत मिलने के बाद स्मृतिनगर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को रायपुर से अभिरक्षा में लिया। उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन और संबंधित दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।
चालक और आरक्षक की नौकरी का दिया झांसा
मामला स्मृतिनगर चौकी, थाना सुपेला क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार 26 अगस्त 2026 को श्रीमती खोमिन ध्रुवे उम्र 36 वर्ष, निवासी आर्यनगर, कोहका, भिलाई ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि वर्ष 2024 में आरोपी तोपचंद धनकर ने उनके पति अश्वनी कुमार ध्रुवे को पुलिस विभाग में चालक के पद पर तथा उनके भाई रितेश ठाकुर को आरक्षक के पद पर शासकीय नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। आरोपी ने नौकरी दिलाने के नाम पर पीड़िता का विश्वास हासिल किया और अलग-अलग समय पर उससे कुल ₹14,00,001 रुपये प्राप्त कर लिए। लंबे समय तक नौकरी नहीं लगने पर पीड़िता ने आरोपी से अपनी रकम वापस मांगी, जिसके बाद मामले की शिकायत पुलिस से की गई।
शिकायत के बाद दर्ज हुआ अपराध
शिकायत के आधार पर चौकी स्मृतिनगर, थाना सुपेला में अपराध क्रमांक 1255/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 318(4) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि आरोपी तोपचंद धनकर के खिलाफ थाना नेवई में पहले से धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। इसके अलावा उसके विरुद्ध दो स्थायी वारंट भी जारी थे। इन मामलों के चलते आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
रायपुर में छिपा था आरोपी
स्मृतिनगर पुलिस ने आरोपी की पतासाजी के लिए उसके संभावित ठिकानों और गतिविधियों की जानकारी जुटाई। लगातार प्रयास के बाद पुलिस टीम को आरोपी के रायपुर में होने की सूचना मिली। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने साहिल किराना स्टोर्स, शिव मंदिर के पास, उरला, रायपुर में दबिश दी और आरोपी तोपचंद धनकर को अभिरक्षा में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से धोखाधड़ी की घटना में प्रयुक्त एक मोबाइल फोन और संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं। साथ ही उसके खिलाफ जारी स्थायी वारंटों की भी तामीली की गई।
नौकरी के नाम पर रकम ऐंठने का तरीका
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने शासकीय पुलिस विभाग में चालक और आरक्षक के पद पर नौकरी लगवाने का दावा कर पीड़ित परिवार को अपने विश्वास में लिया। नौकरी मिलने की उम्मीद में परिवार ने आरोपी को अलग-अलग समय पर रकम दी। आरोपी ने इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुल 14 लाख 1 रुपये प्राप्त कर लिए। जब काफी समय बीतने के बाद भी नौकरी नहीं लगी तो पीड़िता ने आरोपी से संपर्क कर रकम वापस मांगी। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
न्यायालय में किया गया पेश
पुलिस द्वारा पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद आरोपी तोपचंद धनकर को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। उसके खिलाफ वर्तमान धोखाधड़ी के मामले में न्यायिक रिमांड की कार्रवाई की गई है। पुलिस आरोपी से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की भी जांच कर रही है। दुर्ग पुलिस के अनुसार नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से बड़ी रकम ऐंठने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस ने लोगों से की अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि शासकीय नौकरी या किसी अन्य नियुक्ति के नाम पर यदि कोई व्यक्ति पैसे की मांग करता है तो बिना सत्यापन के राशि न दें। किसी भी व्यक्ति द्वारा नौकरी लगवाने के नाम पर धनराशि मांगने की जानकारी मिलने पर तत्काल निकटतम थाना या पुलिस को सूचना दें। पुलिस ने कहा कि नौकरी के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया और संबंधित विभाग से जानकारी का सत्यापन करना बेहद जरूरी है। संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी समय पर पुलिस को देने से ऐसे मामलों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।