श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज रिश्वतकांड में 6 गिरफ्तार, 5 दिन की CBI रिमांड

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Update: 2025-07-02 14:07 GMT
Raipur. रायपुर। श्री रावतपुरा सरकार आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (SRIMSR) को मेडिकल काउंसिल की मान्यता दिलाने के एवज में भारी रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार 6 आरोपियों को सीबीआई की विशेष अदालत ने 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। मामला देशभर के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है।
गिरफ्तार आरोपी:
डॉ. मंजुप्पा सीएन – कर्नाटक के मंड्या मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर
डॉ. चैत्रा एमएस – निरीक्षण टीम की सदस्य
डॉ. अशोक शेलके
अतुल कुमार तिवारी – SRIMSR रायपुर के निदेशक
सतीश – हवाला लेन-देन से जुड़ा व्यक्ति
रविचंद्र – डॉ. चैत्रा का पति
मामले की पृष्ठभूमि
CBI ने खुलासा किया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमले के बाद, भारत सरकार द्वारा "ऑपरेशन सिंदूर" के तहत कार्रवाई की गई थी। इसी के बीच देशभर में मेडिकल कॉलेजों में मान्यता दिलाने के नाम पर रिश्वत वसूली का बड़ा नेटवर्क सामने आया।
CBI ने छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और दिल्ली सहित 40 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की। इसी दौरान यह पूरा नेटवर्क सामने आया, जिसमें SRIMSR रायपुर के निदेशक अतुल कुमार तिवारी समेत मेडिकल काउंसिल से जुड़े डॉक्टरों की भूमिका उजागर हुई।
1.62 करोड़ की डील, 55 लाख की दूसरी किस्त
सूत्रों के अनुसार, आरोपियों को पहले ही 1.62 करोड़ रुपये रिश्वत के रूप में मिल चुके थे। दूसरी किश्त 55 लाख रुपये की थी, जिसे हवाला के जरिए बेंगलुरु भेजा जा रहा था। CBI ने 30 जून को जाल बिछाकर इस रकम को बरामद किया।
डॉ. चैत्रा के पति रविचंद्र से ₹16.62 लाख
डॉ. मंजुप्पा की ओर से सतीश से ₹38.38 लाख
निरीक्षण से पहले मिली गोपनीय जानकारी
CBI के अनुसार, गीतांजलि विश्वविद्यालय, उदयपुर के रजिस्ट्रार मयूर रावल ने SRIMSR रायपुर को निरीक्षण तिथि, टीम और अन्य संवेदनशील विवरण पहले ही लीक कर दिए थे, बदले में उन्होंने 25-30 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
30 जून को NMC द्वारा नामित निरीक्षण टीम जब SRIMSR पहुंची, तब तक पूरा सौदा फाइनल हो चुका था और टीम के सभी सदस्य अनुकूल रिपोर्ट देने के लिए तैयार थे।
गंभीर आरोप, व्यापक जांच जारी
CBI ने अदालत में बताया कि यह सिर्फ एक संस्थान तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि यह मेडिकल शिक्षा में संगठित भ्रष्टाचार का उदाहरण है। कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और हवाला ट्रांजेक्शन के लिंक बरामद किए गए हैं।
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